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समुद्री सुरक्षा को नया बल, नौसेना में एमएच-60आर स्क्वाड्रन शामिल

समुद्री सुरक्षा को नया बल, नौसेना में एमएच-60आर स्क्वाड्रन शामिल

समग्र समाचार सेवा
गोवा | 18 दिसंबर: भारतीय नौसेना की ताकत में बुधवार को एक और अहम इजाफा हुआ, जब गोवा स्थित आईएनएस हंसा में नौसेना की दूसरी एमएच-60आर हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से कमीशन किया गया। इस नई स्क्वाड्रन का नाम आईएनएएस-335 ‘ओस्प्रे’ रखा गया है। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी स्वयं मौजूद रहे, जो इस कार्यक्रम के सामरिक महत्व को दर्शाता है।

एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों को दुनिया के सबसे उन्नत मल्टीरोल नेवल हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। ये हेलिकॉप्टर हर मौसम और हर परिस्थिति में संचालन में सक्षम हैं। पानी के ऊपर और नीचे दोनों तरह के खतरों से निपटने में यह हेलिकॉप्टर नौसेना के लिए एक गेम चेंजर साबित हो रहा है।

इन हेलिकॉप्टरों में अत्याधुनिक सेंसर, एडवांस एवियोनिक्स सिस्टम और शक्तिशाली हथियार प्रणाली लगी है। पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह युद्ध, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव जैसे कई अभियानों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि इसे सिर्फ एक हेलिकॉप्टर नहीं, बल्कि उड़ता हुआ किला माना जाता है।

आईएनएएस-335 ‘ओस्प्रे’ की तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इस नई स्क्वाड्रन के शामिल होने से नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता और तेज प्रतिक्रिया शक्ति कई गुना बढ़ेगी। यह पारंपरिक खतरों के साथ-साथ असममित और छिपे हुए खतरों को भी समय रहते पहचानने और निष्क्रिय करने में सक्षम है।

नौसेना का यह कदम सरकार की समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है। आईएनएएस-335 का कमीशन होना भारतीय नौसेना के निरंतर आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस नई स्क्वाड्रन के साथ भारत की समुद्री सीमाएं अब और अधिक सुरक्षित और चाक-चौबंद हो गई हैं, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और भी सुदृढ़ होगी।

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