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राजस्थान का दबंग आईपीएस फिर सुर्खियों में, जानें कौन हैं पंकज चौधरी

समग्र समाचार सेवा
जयपुर | 19 दिसंबर: राजस्थान कैडर के 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी एक बार फिर विवादों और सुर्खियों के केंद्र में हैं। वर्तमान में वे पुलिस अधीक्षक एवं कम्युनिटी पुलिसिंग के नोडल अधिकारी के रूप में तैनात हैं। सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ खुलकर बोलने वाले चौधरी ने हाल ही में राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

पाक जासूसी कांड से जुड़ा रहा नाम

जैसलमेर में पकड़े गए पाकिस्तानी जासूस शकूर खान मामले में भी पंकज चौधरी का नाम प्रमुखता से सामने आया था। जाँच में यह तथ्य सामने आया कि शकूर खान, कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद के यहां काम कर चुका था और वर्ष 2008 में वह उनका पीए भी रहा था।

जैसलमेर में एसपी रहते हुए चौधरी ने कांग्रेस नेता के घर पाकिस्तानी संपर्क को लेकर संदेह जताया और कार्रवाई शुरू की। हालांकि राजनीतिक दखल के चलते  जाँच  आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद उन्होंने पूर्व मंत्री के पिता गाजी फकीर की आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर हिस्ट्रीशीट खोल दी। इसी के बाद उन्हें जैसलमेर एसपी पद से हटा दिया गया। चौधरी इस पूरे घटनाक्रम का उल्लेख सार्वजनिक मंचों पर कई बार कर चुके हैं।

डिमोशन और निजी विवाद

पंकज चौधरी का सरकार से टकराव कोई नया विषय नहीं है। भजनलाल सरकार और अशोक गहलोत सरकार, दोनों के कार्यकाल में वे कई बार अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट लगी, एक बार बर्खास्तगी का आदेश भी जारी हुआ, जिसे उन्होंने अदालत से रद्द करवाया।

ताजा विवाद 12 फरवरी 2025 को सामने आया, जब कार्मिक विभाग ने उनका डिमोशन आदेश जारी किया। माना जाता है कि उनकी पहली पत्नी से जुड़े निजी विवाद भी इस कार्रवाई की एक वजह बने।

राजनीति में भी आजमा चुके हैं किस्मत

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पंकज चौधरी ने राजनीति में कदम रखने की कोशिश की थी। उस समय वे सेवा से बाहर थे और बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया, जो बाद में निरस्त हो गया।

उनकी पत्नी मुकुल चौधरी ने जोधपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और वर्तमान में भाजपा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आईपीएस चौधरी और उनकी पत्नी के आरएसएस पदाधिकारियों से करीबी संबंध भी अक्सर चर्चा में रहते हैं। माना जाता है कि यही संबंध राजनीतिक दबावों के बीच भी उन्हें मजबूती प्रदान करते रहे हैं।

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