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विश्व हिंदू परिषद : बांग्लादेश उच्चायोग, दीपू दास हत्या पर उग्र प्रदर्शन, आक्रोश

विश्व हिंदू परिषद : बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर उग्र प्रदर्शन, दिपु दास हत्या पर आक्रोश
बैरिकेडिंग से टकराव, नारेबाजी से बढ़ा तनाव

प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेडिंग को धक्का देना शुरू कर दिया। नारेबाजी के बीच “भारत माता की जय”, “यूनुस सरकार होश में आओ” और “हिंदू हत्या बंद करो” जैसे नारे गूंजे। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा की कम से कम दो परतों को पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

                                                                          “आज आवाज नहीं उठाई तो कल हम होंगे दिपु”

प्रदर्शनकारियों में गहरा आक्रोश देखा गया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “अगर आज हमने आवाज नहीं उठाई तो मैं भी दिपु बनूंगा और आप भी दिपु बनेंगे।”
अन्य प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कई लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर दिपु दास के लिए न्याय की मांग करते दिखे। इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के पुतले भी जलाए गए।

पुलिस कार्रवाई और तीन-स्तरीय सुरक्षा

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए दिल्ली पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें क्षेत्र से हटाया। इसके बाद बैरिकेडिंग को फिर से स्थापित किया गया। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उच्चायोग के बाहर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही लागू थी, जिसमें पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती शामिल रही।

हत्या की पृष्ठभूमि और कूटनीतिक प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि 18 दिसंबर को मयमनसिंह के बालुका क्षेत्र में 25 वर्षीय परिधान कारखाना कर्मचारी दिपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और बाद में शव को जला दिया गया था। इस घटना ने व्यापक आक्रोश और अंतरराष्ट्रीय चिंता को जन्म दिया है। मामले में अब तक कम से कम 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

इस बीच, बांग्लादेश ने भारत में अपने राजनयिक मिशनों पर हुई घटनाओं पर चिंता जताई है और जांच व सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। भारत ने सुरक्षा में चूक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नई दिल्ली का प्रदर्शन अल्पकालिक था और इससे किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न नहीं हुआ। पूरा विवाद बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या से उपजा है, जिसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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