Site icon Samagra Bharat News website

अब हर गरम पेय ‘चाय’ नहीं, सरकार ने तय की नई पहचान

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,25 दिसंबर: खाद्य सुरक्षा से जुड़े केंद्रीय प्राधिकरण ने चाय की परिभाषा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब साफ कर दिया गया है कि ‘चाय’ शब्द का इस्तेमाल केवल उसी पेय के लिए किया जा सकता है, जो एक निर्धारित चाय पौधे की पत्तियों से तैयार हो। इसके अलावा किसी भी जड़ी-बूटी, फूल या अन्य पौधों से बने पेयों को चाय कहना भ्रामक और नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।

बाज़ार में फैल रहे भ्रम पर रोक

प्राधिकरण के अनुसार, बाज़ार में लंबे समय से ऐसे कई पेय चाय के नाम से बेचे जा रहे थे, जो वास्तव में चाय नहीं हैं। इनमें जड़ी-बूटी से बने पेय, फूलों से तैयार पेय और अन्य प्राकृतिक मिश्रण शामिल हैं। नए निर्देशों के मुताबिक ग्रीन चाय, कांगड़ा क्षेत्र की चाय और तुरंत घुलने वाली चाय भी उसी स्थिति में चाय कहलाएंगी, जब वे तय चाय पौधे से बनी हों।

पैकिंग और नामकरण पर सख़्ती

अब हर खाद्य पैकेट पर उसका सही और वास्तविक नाम साफ़ तौर पर लिखना ज़रूरी होगा। जो पेय निर्धारित चाय पौधे से नहीं बने हैं, उनके लिए ‘चाय’ शब्द का उपयोग करना गलत लेबलिंग माना जाएगा। ऐसे उत्पादों को अलग श्रेणी में रखा जाएगा और उन पर अलग नियम लागू होंगे।

निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए निर्देश

निर्माता, विक्रेता, आयातक और ऑनलाइन माध्यमों से बिक्री करने वाली कंपनियों को आदेश दिया गया है कि वे तुरंत ऐसे सभी उत्पादों से ‘चाय’ शब्द हटाएं, जो नियमों के अनुसार चाय नहीं हैं। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के अधिकारियों को कड़ी निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा

इस फैसले के बाद जड़ी-बूटी, डिटॉक्स और फूलों से बने पेय बाज़ार में मिलते रहेंगे, लेकिन उन्हें चाय के नाम से नहीं बेचा जा सकेगा। इससे उपभोक्ताओं को यह साफ़ समझने में मदद मिलेगी कि वे जो पेय पी रहे हैं, वह असली चाय है या केवल हर्बल पेय।

Exit mobile version