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प्रदूषण और राजनीतिक झगड़ा आप ने एलजी को बताया गजनी

प्रदूषण और राजनीतिक झगड़ा आप ने एलजी को बताया ‘गजनी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 26 दिसंबर: दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) और उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के बीच सियासी टकराव और तेज़ हो गया है। AAP ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट साझा कर उपराज्यपाल पर तीखा तंज कसा और उन्हें ‘दिल्ली का गजनी’ करार दिया। पार्टी का आरोप है कि प्रदूषण के मुद्दे पर एलजी की “याददाश्त चली गई है” और उन्होंने “गलत व्यक्ति” को पत्र लिख दिया।

आप का आरोप: प्रदूषण ने एलजी की ‘मेमोरी’ पर डाला असर

आप का कहना है कि राजधानी में प्रदूषण चरम पर है, लेकिन उपराज्यपाल ने प्रदूषण नियंत्रण में कथित लापरवाही को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिख दिया, जबकि मौजूदा सरकार भाजपा-नेतृत्व वाली है। पार्टी ने इसे तथ्यात्मक भूल बताते हुए कहा कि यह दिखाता है कि एलजी को मौजूदा राजनीतिक स्थिति का भी ध्यान नहीं रहा।

‘दिल्ली का गजनी’ कहकर कसा तंज

आप के पोस्ट में वी.के. सक्सेना को ‘दिल्ली का गजनी’ बताते हुए कहा गया कि उन्होंने प्रदूषण के लिए केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया, जबकि अब दिल्ली में मुख्यमंत्री पद पर रेखा गुप्ता हैं। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि उपराज्यपाल ने गलत व्यक्ति को पत्र लिखकर राजनीतिक बयानबाजी को हवा दी।

एलजी का पत्र और आरोप

इससे पहले मंगलवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर उनकी सरकार पर ‘11 वर्षों की उपेक्षा और आपराधिक निष्क्रियता’ का आरोप लगाया था। पत्र में राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया।

आप का पलटवार: “दिमाग पर भी असर पड़ा”

आप नेता अनुराग ढांडा ने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि जब दिल्ली गंभीर प्रदूषण से जूझ रही है, तब एलजी गुजरात दौरे पर थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दिल्ली का प्रदूषण लोगों के फेफड़ों पर असर कर रहा है, लेकिन लगता है एलजी साहब के दिमाग पर भी असर हो गया है। उन्हें यह तक याद नहीं कि अब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल नहीं, बल्कि रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री हैं।”

प्रदूषण पर जारी सियासत

राजधानी में खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ रहे हैं। जहाँ एक ओर उपराज्यपाल प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, वहीं आप इसे राजनीतिक बयानबाजी करार देकर मौजूदा सरकार और केंद्र पर जिम्मेदारी डाल रही है। प्रदूषण से राहत के ठोस कदमों के बजाय सियासी घमासान ने माहौल और गरमा दिया है।

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