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विदेश नीति किसी दल की नहीं, भारत की होती है: शशि थरूर

विदेश नीति किसी दल की नहीं, भारत की होती है: शशि थरूर

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,27 दिसंबर: कांग्रेस नेता शशि थरूर एक बार फिर अपने राष्ट्रहित से जुड़े बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए थरूर ने कहा कि भारत की विदेश नीति किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश से जुड़ा विषय है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रधानमंत्री हारते हैं, तो वह केवल एक व्यक्ति या सरकार की नहीं, बल्कि भारत की हार होती है।

राष्ट्रीय हित राजनीति से ऊपर

शशि थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री की असफलता पर खुशी मनाना देश की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को कमजोर करने जैसा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को याद करते हुए कहा,
“अगर भारत ही नहीं बचेगा, तो फिर कौन बचेगा?”
थरूर ने जोर दिया कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर एकजुटता जरूरी है।

पाकिस्तान की बदलती रणनीति पर चेतावनी

इंडिया टुडे से बातचीत में थरूर ने पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब केवल ड्रोन और पारंपरिक मिसाइलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह रणनीति छिपकर हमला करने की दिशा में इशारा करती है, जिसे भारत किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं कर सकता।

कमजोर अर्थव्यवस्था, मजबूत सेना

थरूर ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार वहां की सरकार कमजोर है और असली सत्ता सेना के पास है। पाकिस्तान की GDP ग्रोथ महज 2.7 फीसदी है और देश आर्थिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर है।

बांग्लादेश-पाकिस्तान समीकरण से पूर्वोत्तर को खतरा

उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौतों को भारत के लिए नई चुनौती बताया। थरूर ने कहा कि कुछ ताकतें खुलेआम पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से अलग करने की बात कर रही हैं, जो गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है।

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