Site icon Samagra Bharat News website

जयशंकर को बलूच नेता का पत्र, पाकिस्तान की धरती से भारत को खुला समर्थन

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 02 जनवरी: पाकिस्तान की ज़मीन से भारत के समर्थन में एक असाधारण और खुला संदेश सामने आया है। बलूचिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 के पहले सप्ताह में बलूचिस्तान “2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक” आयोजित करेगा। इस पहल के तहत बलूचिस्तान पहली बार सीधे विश्व के विभिन्न देशों से संवाद करेगा।

मीर यार बलूच का कहना है कि बलूच जनता ने अब पाकिस्तान से अलग राह चुनने का मन बना लिया है और यह फैसला किसी तात्कालिक भावना का नहीं, बल्कि दशकों के दमन का परिणाम है।

भारत को बताया स्वाभाविक मित्र

इस अंतरराष्ट्रीय पहल के तहत मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक औपचारिक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि बलूचिस्तान की जनता भारत को अपना स्वाभाविक मित्र मानती है और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रश्न पर भारत की भूमिका को निर्णायक मानती है।

पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध अपनाई गई कठोर नीति ने पूरे क्षेत्र में एक स्पष्ट संदेश दिया है कि हिंसा और पनाहगाहों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“79 वर्षों का अत्याचार अब स्वीकार्य नहीं”

मीर यार बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तानी शासन, सैन्य हस्तक्षेप और राज्य-प्रायोजित आतंकवाद का शिकार रहा है। उनका कहना है कि अपहरण, हत्याएँ, जबरन ग़ायब किए जाना और नागरिक अधिकारों का हनन बलूच जनता की रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अब बलूचिस्तान स्थायी शांति, आत्मनिर्णय और संप्रभुता से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

चीन-पाकिस्तान गठजोड़ पर गंभीर चेतावनी

भारत-बलूचिस्तान संबंधों को समय की ज़रूरत बताते हुए मीर यार बलूच ने चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य-आर्थिक तालमेल पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा केवल आर्थिक परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक सैन्य विस्तार का माध्यम बनता जा रहा है।

उनके अनुसार, यदि बलूचिस्तान की सुरक्षा क्षमताओं को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया, तो निकट भविष्य में बलूच भूमि पर विदेशी सैन्य मौजूदगी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, जो पूरे दक्षिण एशिया के संतुलन को प्रभावित करेगी।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता की तैयारी

मीर यार बलूच लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान की आज़ादी और मानवाधिकारों का मुद्दा उठाते रहे हैं। 14 मई 2025 को उन्होंने पाकिस्तान से अलग “बलूचिस्तान गणराज्य” की घोषणा करते हुए इसे बलूच जनता की सामूहिक इच्छा करार दिया था।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान को स्वतंत्र इकाई के रूप में मान्यता देने, शांति बल की तैनाती और पाकिस्तानी सेना की वापसी की माँग भी की है। साथ ही वर्ष 2026 से 190 देशों में राजनयिक मिशन स्थापित करने की योजना की घोषणा की गई है।

बदलते क्षेत्रीय समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के भीतर से उठा यह स्वर केवल मानवाधिकार का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में नए समीकरण गढ़ने की ओर इशारा करता है। भारत, पाकिस्तान, चीन और बलूचिस्तान चारों के बीच उभरता यह समीकरण आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा असर डाल सकता है।

Exit mobile version