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ग्वालियर में अंबेडकर की फोटो जलाने पर बवाल

समग्र समाचार सेवा
ग्वालियर | 02 जनवरी: डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने और आपत्तिजनक नारेबाज़ी के मामले ने ग्वालियर में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा दिया है। शुक्रवार को भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी सहित कई दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को अपर्याप्त बताते हुए एडवोकेट अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की मांग की।

7 लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर, 4 आरोपी हिरासत में

पुलिस के अनुसार, गुरुवार रात डॉ. अंबेडकर की तस्वीर जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के मामले में साइबर सेल थाना, ग्वालियर में एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में अब तक चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने बताया कि एडवोकेट अनिल मिश्रा को गुरुवार रात उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे मुरैना में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे।

मेडिकल के बाद कोर्ट में पेशी, वकीलों ने जताई आपत्ति

हिरासत में लिए गए चारों आरोपियों को पुलिस ने मेडिकल परीक्षण के लिए पुरानी छावनी थाने से जिला अस्पताल पहुंचाया। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया।
इस दौरान कोर्ट परिसर के बाहर मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया, जिस पर कुछ वकीलों ने आपत्ति जताई। वकीलों का कहना है कि उन्हें भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया।

एसएसपी के मौके पर आने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने साफ कहा कि जब तक एसएसपी धर्मवीर सिंह स्वयं मौके पर पहुंचकर ठोस कार्रवाई का आश्वासन नहीं देंगे, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। संगठनों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। बाद में प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम सीबी प्रसाद को ज्ञापन सौंपा। कार्रवाई के आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया गया।

एनएसए की मांग पर अधिकारियों का क्या कहना है

एसडीएम सीबी प्रसाद ने बताया कि पोस्टर जलाने की घटना के विरोध में लोग प्रदर्शन के लिए आए थे और उन्होंने ज्ञापन सौंपा है। एसपी के निर्देश पर पुलिस पहले ही कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि धाराएं बढ़ाने या एनएसए लगाने का फैसला कोर्ट की प्रक्रिया के तहत होता है। एनएसए की कार्रवाई एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को अपीलीय बोर्ड में प्रतिवेदन भेजना होता है।

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