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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा ‘स्टेट स्पॉन्सर्ड’ जैसी: सुनील आंबेकर

समग्र समाचार सेवा
दिल्ली, 4 जनवरी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को “स्टेट स्पॉन्सर्ड हिंसा जैसी” बताया। एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं दिख रहे हैं और पूरी दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए।

आंबेकर ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन नहीं होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर ऐसे मामलों पर लगाम कसनी जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में हालात बदलने चाहिए।

आरएसएस के 100 वर्ष और ‘राष्ट्र सर्वप्रथम’

दिल्ली शब्दोत्सव कार्यक्रम में आंबेकर ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक प्रक्रिया-संचालित, प्रगतिशील व्यवस्था के साथ आगे बढ़ा है। संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की सोच का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस का प्रमुख सिद्धांत “राष्ट्र सर्वप्रथम” है और लक्ष्य पूरे समाज को जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि देशभर में रोज़ करीब 87,000 शाखाएं लगती हैं, जिनमें 32,000 साप्ताहिक हैं, और युवा देश के लिए कुछ करने को उत्सुक हैं।

जेन ज़ी , लोकतंत्र और सामाजिक मुद्दे

जेन ज़ी पर बोलते हुए आंबेकर ने कहा कि भारतीय युवा संविधान, देश और रचनात्मक बदलाव के साथ हैं। उन्होंने युवाओं की चुनौतियों जैसे देर से विवाह को सामाजिक संदर्भ में समझने और संवाद से समाधान निकालने पर ज़ोर दिया।

हिंदुत्व, जाति राजनीति और वैश्विक परिदृश्य

हिंदुत्व को सांस्कृतिक पहचान बताते हुए आंबेकर ने कहा कि यह जोड़ने वाला सूत्र है। जाति आधारित राजनीति पर उन्होंने कहा कि सामाजिक मेलजोल बढ़े तो ऐसी राजनीति कमजोर पड़ेगी।

विदेशों में हिंदुओं पर हमलों और वैश्विक संघर्षों का संदर्भ देते हुए उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम” के संदेश की आज की जरूरत बताई।

राहुल गांधी पर टिप्पणी

विदेशों में भारत को लेकर दिए गए बयानों पर आंबेकर ने राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि भारत के मामलों में राष्ट्रीय एकजुटता जरूरी है और विदेश जाकर देश के खिलाफ बोलना उचित नहीं।

भाजपा–संघ समन्वय

आंबेकर ने कहा कि आरएसएस सामाजिक सांस्कृतिक संस्था है। संघ द्वारा प्रेरित पार्टी आज सत्ता में है और समन्वय बना हुआ है। उनका मानना है कि भविष्य में अन्य दल भी संघ के विचारों को अपनाएंगे।

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