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अकोट में सियासत पलटी, बीजेपी–एआईएमआईएम एक साथ

समग्र समाचार सेवा
अकोला |07 जनवरी: महाराष्ट्र की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में वैचारिक रूप से एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन एक ही सत्ता मंच पर आ गए हैं। इस गठबंधन ने न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि पूरे राज्य के सियासी समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

जब बहुमत नहीं, तब समझौता

35 सदस्यीय अकोट नगर परिषद में 33 सीटों पर चुनाव हुए। सबसे अधिक सीटें मिलने के बावजूद भाजपा बहुमत से दूर रह गई। ऐसे में सत्ता की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ के नाम से एक साझा गठबंधन का गठन किया, जिसे जिला प्रशासन के समक्ष औपचारिक रूप से पंजीकृत कराया गया।

‘अकोट विकास मंच’ में कौन-कौन

इस गठबंधन की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें वे दल भी शामिल हैं, जो आमतौर पर एक-दूसरे के खिलाफ तीखे राजनीतिक हमले करते रहे हैं।

भाजपा – 11 सीटें
एआईएमआईएम – 5 सीटें
प्रहार जनशक्ति पक्ष – 3 सीटें
शिवसेना (उद्धव गुट) – 2 सीटें
शिवसेना (शिंदे गुट) – 1 सीट
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) – 2 सीटें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) – 1 सीट

कुल मिलाकर यह संख्या बहुमत के आंकड़े को पार कर जाती है, जिससे सत्ता गठन का रास्ता साफ हो गया।

क्यों है यह गठबंधन हैरान करने वाला

पहली वजह वैचारिक टकराव है। भाजपा जहां हिंदुत्व आधारित राजनीति करती है, वहीं एआईएमआईएम मुस्लिम समुदाय के हितों की बात करती है। दूसरी बड़ी वजह यह कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़े, जो राज्य स्तर पर आमने-सामने हैं, यहां एक ही मंच पर साथ दिखे। तीसरी अहम बात यह रही कि शिवसेना के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने भी इस गठबंधन का समर्थन किया।

विपक्ष में कौन

इस बड़े गठबंधन के बाद विपक्ष की भूमिका सीमित रह गई है। नगर परिषद में अब केवल कांग्रेस के 6 और वंचित बहुजन अघाड़ी के 2 पार्षद विपक्ष में हैं।

स्थानीय राजनीति, बड़ा संदेश

अकोट का यह प्रयोग एक बार फिर यह दिखाता है कि स्थानीय सत्ता की राजनीति में विकास और संख्या, विचारधारा पर भारी पड़ जाती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘विकास मंच’ कितने समय तक एकजुट रह पाता है और इसका असर राज्य की व्यापक राजनीति पर कितना पड़ता है।

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