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अमेरिका का बड़ा फैसला: ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैरिफ

 

समग्र समाचार सेवा
वाशिंगटन | 13 जनवरी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ दबाव और कड़ा करते हुए बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। ट्रंप ने घोषणा की कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका के साथ होने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का ऐलान

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों को इसकी कीमत चुकानी होगी। उनके मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य तेहरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना है।

व्हाइट हाउस: कूटनीति पहली पसंद

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने वाइट हाउस की ओर से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए कूटनीति अभी भी पसंदीदा विकल्प है, लेकिन बल प्रयोग की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।

फॉक्स न्यूज से बातचीत में फॉक्स न्यूज को उन्होंने कहा, “जब आवश्यक होगा, संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी सेना की घातक शक्ति और क्षमता का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हवाई हमले राष्ट्रपति के पास मौजूद विकल्पों में से एक हैं।

ईरान में हिंसा और बढ़ती मौतें

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 599 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, ईरान सरकार ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

मध्यस्थता की कोशिशें और तेहरान का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति की यह सख्त भाषा ओमान के विदेश मंत्री की हालिया ईरान यात्रा के बाद सामने आई है। ओमान लंबे समय से वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने कहा कि हालात नियंत्रण में हैं। उन्होंने हिंसा के लिए इज़राइल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।

परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा अमेरिका

विश्लेषकों के अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लेकर ट्रंप प्रशासन की कड़ी शर्तें बातचीत को जटिल बना रही हैं। तेहरान इन कार्यक्रमों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानता है, जबकि वाशिंगटन इन्हें क्षेत्रीय और वैश्विक खतरा करार देता है।

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