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अमेरिका-यूरोप आमने-सामने, ग्रीनलैंड पहुँचे यूरोपीय सैनिक

समग्र समाचार सेवा
वॉशिंगटन/नूक। 16 जनवरी: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर लगातार दिए जा रहे बयानों के चलते आर्कटिक क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ट्रंप ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की आवश्यकता दोहराते रहे हैं, जबकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा सवाल बताया है।

व्हाइट हाउस वार्ता, पर सहमति नहीं

ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की व्हाइट हाउस में अमेरिकी प्रतिनिधियों से बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच अब भी मूलभूत असहमति बनी हुई है, हालांकि संवाद जारी रहेगा।

यूरोपीय देशों ने दिखाई एकजुटता

राजनयिक गतिरोध के बीच कई यूरोपीय देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुँचने लगे हैं। इसे डेनमार्क के समर्थन और आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। डेनमार्क ने अपने नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर “ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस” के तहत सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है।

फ्रांस और जर्मनी की तैनाती

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि फ्रांसीसी सेना की शुरुआती टुकड़ियाँ रवाना हो चुकी हैं। अधिकारियों के अनुसार लगभग 15 फ्रांसीसी सैनिक ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैन्य अभ्यास के लिए तैनात हैं।

वहीं, जर्मनी ने 13 सैनिकों की एक टोही इकाई भेजने की घोषणा की है, जबकि फिनलैंड भी अपने सैन्य संपर्क अधिकारियों को वहाँ तैनात करेगा।

ट्रंप का रुख बरकरार

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। उनका तर्क है कि यदि अमेरिका वहाँ सक्रिय नहीं हुआ तो रूस और चीन प्रभाव बढ़ा सकते हैं।

हालाँकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय सैनिकों की तैनाती से राष्ट्रपति के फैसले या ग्रीनलैंड को लेकर उनकी नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा।

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