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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बराबरी की जंग, 18–18 के आंकड़े में उलझी बाज़ी

समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़, 22 जनवरी: चंडीगढ़ महापौर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हैं। मेयर की कुर्सी पर काबिज़ होने की होड़ में मुकाबला इस कदर कड़ा हो गया है कि नतीजा एक ही वोट पर टिका दिख रहा है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी है, तो दूसरी ओर उसे रोकने के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच तालमेल के संकेत मिल रहे हैं।

गठबंधन पर चुप्पी, बातचीत जारी

चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह लकी ने साफ किया कि अभी तक आप के साथ किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भाजपा को महापौर पद से दूर रखने के लिए बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी को होने वाले चुनाव से पहले रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है।

पुरानी तकरार, नई मजबूरी

महीने की शुरुआत में आप और कांग्रेस के बीच तल्खी तब सामने आई थी, जब आप के चंडीगढ़ प्रभारी ने कांग्रेस पर भाजपा से अंदरूनी समझौते का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पिछले नगर निगम कार्यकाल में आप की भूमिका पर सवाल उठाए थे। अब बदलते अंकगणित ने दोनों दलों को एक-दूसरे के करीब ला खड़ा किया है।

मेयर चुनाव का सटीक गणित

नगर निगम में कुल 36 वोट हैं। दो पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा के पास 18 वोट हो गए हैं। आप के 11 और कांग्रेस के 6 पार्षदों के साथ कांग्रेस सांसद का एक मत जोड़ने पर विपक्षी खेमे के पास भी 18 वोट बनते हैं। बहुमत के लिए 19 वोट अनिवार्य हैं। ऐसे में किसी भी पार्षद की गैरहाज़िरी या रुख बदलना पूरे परिणाम को पलट सकता है।

प्रक्रिया में बदलाव, पारदर्शिता पर ज़ोर

इस बार महापौर, वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर के चुनाव में गुप्त मतदान नहीं होगा। हाथ उठाकर मतदान कराया जाएगा। बीते चुनावों में विवादों के बाद यह बदलाव पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

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