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ड्रोन वॉरफेयर से पुष्पवर्षा तक, कर्तव्य पथ पर भारत की बदलती सैन्य ताकत का ऐतिहासिक प्रदर्शन

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26 जनवरी। 77वें गणतंत्र दिवस की परेड कर्तव्य पथ पर पूरे शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रगौरव के साथ आरंभ हुई। आसमान से एमआई-17 हेलिकॉप्टरों द्वारा की गई पुष्पवर्षा ने परेड को विशेष बना दिया। सैन्य बैंड ने ढोल और शहनाई पर ‘वंदे मातरम्’ की मधुर धुन प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति से भर दिया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” रखी गई है।

शहीदों को श्रद्धांजलि

परेड से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहे। पूरे देश में गणतंत्र दिवस को उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है।

राष्ट्रपति की अगुवाई, विदेशी मेहमानों की मौजूदगी

कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह का नेतृत्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। लगभग 90 मिनट तक चलने वाली इस परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

परेड कमांड और सैन्य नवाचार

परेड का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल भावनिश कुमार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, दिल्ली एरिया ने किया। इस वर्ष पहली बार भारतीय सेना ने चरणबद्ध ‘बैटल ऐरे फॉर्मेट’ का प्रदर्शन किया, जिसमें थल और वायु घटक दोनों शामिल रहे। परेड में उच्च गतिशीलता वाला टोही वाहन और भारत का पहला स्वदेशी बख्तरबंद हल्का विशेष वाहन भी प्रदर्शित किया गया।

सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई

गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। देशविरोधी गतिविधियों की आशंका को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एसएसबी की 42वीं वाहिनी के सेनानायक गंगा सिंह उदावत के अनुसार सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सड़क, जंगल, पगडंडियों और जल क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।

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