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भारत-अमेरिका की संयुक्त रणनीति: नार्को-टेरर और नशा तस्करी पर कड़ा प्रहार

 

समग्र समाचार सेवा
वाशिंगटन। 27 जनवरी: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने नशे की तस्करी और उससे जुड़े आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ सहयोग को और मज़बूत करने की दिशा में एक अहम क़दम उठाया है। दोनों देशों ने इसके लिए एक नया संयुक्त वर्किंग ग्रुप गठित किया है, जिसका उद्देश्य अवैध नशीले पदार्थों के खतरे से समाज और सुरक्षा तंत्र को सुरक्षित रखना है।

वाशिंगटन में हुई पहली बैठक

व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक 20 और 21 जनवरी को वाशिंगटन में आयोजित की गई। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और सहयोग को ठोस नतीजों तक पहुँचाने पर ज़ोर दिया।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा

अमेरिका के राष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण नीति कार्यालय की निदेशक सारा कार्टर ने बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि नशे का संकट अब केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नशे से जुड़े आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर एकमत हैं।

भारत की प्राथमिकता: कड़ी निगरानी

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत नशीले पदार्थों की तस्करी से उत्पन्न खतरों को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने प्रीकर्सर केमिकल्स के अवैध डायवर्जन पर नियंत्रण की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया।

वैध व्यापार और क़ानून का संतुलन

क्वात्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत प्रवर्तन की सख़्ती और वैध व्यापार को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाए रखने पर काम कर रहा है। इसमें कानूनी फार्मास्युटिकल गतिविधियों की सुरक्षा भी शामिल है, ताकि नियमों के अनुरूप उद्योग प्रभावित न हों।

नेतृत्व और लक्ष्य

इस वर्किंग ग्रुप का नेतृत्व अमेरिकी पक्ष से एक्टिंग ओएनडीसीपी डिप्टी डायरेक्टर डेबी सेगुइन और भारतीय पक्ष से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की डिप्टी डायरेक्टर जनरल मोनिका आशीष बत्रा कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, समूह मापे जा सकने वाले और व्यावहारिक परिणामों पर केंद्रित रहेगा।

समन्वित सरकारी प्रयास

दोनों देशों ने अवैध नशीले पदार्थों और उन्हें तैयार करने वाले रसायनों के उत्पादन व तस्करी को रोकने के लिए पूरे सरकारी तंत्र के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर सहमति जताई। एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को इस लड़ाई की अहम कड़ी बताया गया।

वैश्विक चुनौती के बीच पहल

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब कृत्रिम नशों और रसायनों के दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियाँ वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह वर्किंग ग्रुप भारत-अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य सुरक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी मज़बूत करना है।

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