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मिजोरम सरकार स्कूलों में हिंदी भाषी और मातृभाषा दिवस शुरू करेगी

समग्र समाचार सेवा
आइज़ोल | 29 जनवरी: मिजोरम सरकार ने राज्य के स्कूलों में हिंदी दक्षता बढ़ाने और विद्यार्थियों को भाषा संबंधी कठिनाइयों से उबारने के उद्देश्य से एक नई पहल की घोषणा की है। इसके तहत सभी सरकारी और निजी स्कूलों में हर महीने एक दिन ‘हिंदी बोलने का दिन’ मनाया जाएगा। इस दिन छात्रों और शिक्षकों को आपसी संवाद हिंदी में करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने की घोषणा

स्कूल शिक्षा मंत्री वनलालथलाना ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की निगरानी में लागू किया जाएगा।

महीने में एक दिन हिंदी संवाद

मंत्री के अनुसार, हिंदी बोलने का दिन महीने में एक बार आयोजित होगा, जिसमें कक्षा के अंदर और बाहर संवाद मुख्य रूप से हिंदी में होगा, ताकि छात्रों का आत्मविश्वास बढ़े और वे भाषा के प्रयोग में सहज हो सकें।

बहुभाषी राज्य में हिंदी की आवश्यकता

मंत्री ने कहा कि मिजोरम जैसे बहुभाषी राज्य में छात्रों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए हिंदी की बुनियादी समझ आवश्यक है। कई छात्र हिंदी के अभाव में पाठ्य सामग्री समझने, केंद्रीय संस्थानों की परीक्षाओं और अंतरराज्यीय संवाद में कठिनाई महसूस करते हैं। यह पहल उसी भाषा-खाई को पाटने की दिशा में एक कदम है।

स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषाओं को कमजोर करना नहीं है। मिजोरम की मातृभाषा मिजो और अन्य स्थानीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन सरकार की प्राथमिकता में बना रहेगा। हिंदी बोलने का दिन केवल एक अभ्यासात्मक पहल है।

स्कूलों में होंगी भाषाई गतिविधियाँ

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान स्कूलों में सरल गतिविधियाँ कराई जाएंगी—जैसे हिंदी में संवाद, कहानी सुनाना, वाद-विवाद, कविता पाठ और दैनिक जीवन से जुड़े छोटे संवाद। इससे छात्रों में डर कम होगा और भाषा के प्रति रुचि बढ़ेगी।

शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान

इसके साथ ही राज्य सरकार शिक्षक योग्यता और प्रशिक्षण मानकों को भी मजबूत करने पर काम कर रही है। हिंदी पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पहल को संतुलित तरीके से लागू किया गया, तो यह छात्रों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों ने यह भी कहा है कि स्थानीय भाषाओं की गरिमा और प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।

बहुभाषी शिक्षा की दिशा में कदम

कुल मिलाकर, मिजोरम सरकार की यह पहल छात्रों को बहुभाषी बनाने, राष्ट्रीय स्तर पर अवसरों के लिए तैयार करने और शिक्षा में भाषा संबंधी बाधाओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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