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डिजिटल लत बन रही बच्चों और युवाओं के मानसिक संकट की बड़ी वजह

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 30 जनवरी: देश में बच्चों और युवाओं के बीच डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन खेलों का अत्यधिक उपयोग युवाओं की मानसिक स्थिति को कमजोर कर रहा है।

पढ़ाई और कार्यक्षमता पर असर

सर्वेक्षण के अनुसार, लगातार स्क्रीन देखने की आदत से युवाओं की पढ़ाई और कामकाज प्रभावित हो रहा है। नींद की कमी, ध्यान भटकना और एकाग्रता में गिरावट आम समस्या बनती जा रही है, जिससे उनका सामाजिक आत्मविश्वास भी कम हो रहा है।

युवाओं में सोशल मीडिया की लत पर चिंता

आर्थिक सर्वेक्षण में 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में सोशल मीडिया की बढ़ती लत को विशेष चिंता का विषय बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह लत चिंता, अवसाद, आत्मसम्मान में कमी और साइबर उत्पीड़न जैसी समस्याओं से जुड़ी हुई है।

ऑनलाइन खेलों से व्यवहारिक बदलाव

लगातार स्क्रॉल करने की आदत और ऑनलाइन खेलों का अत्यधिक उपयोग युवाओं में चिड़चिड़ापन, नींद संबंधी परेशानी, आक्रामक व्यवहार और सामाजिक दूरी बढ़ा रहा है। सर्वेक्षण ने इसे मानसिक संतुलन के लिए जोखिमपूर्ण बताया है।

सरकारी स्तर पर उठाए गए कदम

डिजिटल लत से निपटने के लिए सरकार ने कई पहल की हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने विद्यालयों और विद्यालय बसों में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय की ‘प्रज्ञ्यता’ रूपरेखा डिजिटल शिक्षा के दौरान स्क्रीन समय संतुलन पर जोर देती है।

टेली-मानस और शट क्लिनिक की भूमिका

सर्वेक्षण में बताया गया कि अक्टूबर 2022 में शुरू की गई टेली-मानस मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन पर अब तक 32 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान में संचालित शट क्लिनिक तकनीक के अनियंत्रित उपयोग से प्रभावित किशोरों और युवाओं को विशेष उपचार प्रदान कर रहा है।

संतुलित डिजिटल उपयोग की सिफारिश

आर्थिक सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल पहुँच को पूरी तरह सीमित करना संभव नहीं है। इसलिए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शहरी झुग्गी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में ऑफलाइन युवा केंद्र, सुरक्षित ऑनलाइन मंच और डिजिटल कल्याण पाठ्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की गई है।

समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर

सर्वेक्षण के निष्कर्ष में कहा गया है कि बच्चों और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर समान रूप से ध्यान देने वाला समग्र दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।

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