Site icon Samagra Bharat News website

बांग्लादेश : अवामी लीग पर प्रतिबंध, बीएनपी और जमात गठबंधन में टक्कर

बांग्लादेश : अवामी लीग पर प्रतिबंध, बीएनपी और जमात गठबंधन में टक्कर

पूनम शर्मा

बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव इस बार अभूतपूर्व राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कराए जा रहे हैं। करीब 50 राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा घटनाक्रम पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना है। इस फैसले ने देश की राजनीति को पूरी तरह दो ध्रुवों में बांट दिया है और चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच सिमटता दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में सीधी टक्कर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और 11 दलों के गठबंधन के बीच है, जिसका नेतृत्व देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी कर रही है। लंबे समय से विपक्ष में रही बीएनपी इस बार सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को अगली सरकार का संभावित नेता माना जा रहा है। तारिक रहमान ने हाल के महीनों में संगठनात्मक स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए कई राजनीतिक दौरों और बैठकों का आयोजन किया है।

वहीं दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन एक मजबूत वैकल्पिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। इस गठबंधन में हाल ही में गठित नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) भी शामिल है, जिसे छात्र आंदोलन से जुड़े नेताओं ने बनाया है। एनसीपी का दावा है कि वह युवाओं की आवाज को राजनीति में प्रभावी ढंग से सामने लाएगी और पारंपरिक दलों से निराश मतदाताओं को एक नया विकल्प देगी। छात्र आंदोलन से उपजे इस दल के जुड़ने से गठबंधन को शहरी युवा वोटरों में समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अवामी लीग पर प्रतिबंध को लेकर देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और कुछ पश्चिमी देशों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डालने वाला कदम बताया है। वहीं सरकार समर्थक हलकों का तर्क है कि यह फैसला कानूनी और संवैधानिक दायरे में लिया गया है।

चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की है। पिछले चुनावों में हिंसा, बहिष्कार और आरोप-प्रत्यारोप के चलते चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। इस बार सुरक्षा एजेंसियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

कुल मिलाकर, बांग्लादेश का यह चुनाव देश की लोकतांत्रिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। अवामी लीग की अनुपस्थिति में मतदाताओं के सामने दो प्रमुख विकल्प हैं—बीएनपी या जमात के नेतृत्व वाला गठबंधन। आने वाले दिनों में चुनावी प्रचार के तेज होने के साथ ही राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है।

Exit mobile version