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विधाननगर ,पश्चिम बंगाल चुनाव , इस बार बदलेगा समीकरण?

पश्चिम बंगाल चुनाव की घोषणाओं पर राजनीतिक समीकरण

समग्र समाचार सेवा
कोलकाता,पश्चिम बंगाल 13 फरवरी : पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘सॉल्ट लेक’ यानी विधाननगर की सीट हमेशा से हाई-प्रोफाइल रही है। जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, इस शहरी सीट पर एक बार फिर सबकी नजरें टिक गई हैं। विधानसभा क्षेत्र संख्या 116, विधाननगर, न केवल एक वीआईपी इलाका है, बल्कि यहां का चुनावी मिजाज राज्य की सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।

सुजीत बोस: टीएमसी का अभेद्य किला?

पिछले तीन चुनावों का रिकॉर्ड देखें तो विधाननगर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गढ़ बन चुका है। दिग्गज नेता सुजीत बोस यहां 2011 से लगातार जीतते आ रहे हैं। 2021 के चुनावों में मुकाबला बेहद दिलचस्प था, क्योंकि उनके सामने भाजपा की ओर से सब्यसाची दत्ता थे, जो कभी खुद टीएमसी के बड़े नेता हुआ करते थे। उस कड़े मुकाबले में सुजीत बोस ने करीब 8,000 वोटों के अंतर से अपनी कुर्सी बचाई थी।

चुनावी अंकगणित और वोटरों का रुझान

विधाननगर एक सामान्य (General) सीट है, जो बारासात लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है, जो चुनाव परिणामों को पलटने की ताकत रखती है।

2021 का हाल: कुल 2,43,360 मतदाताओं में से करीब 66.8% लोगों ने मतदान किया था। सुजीत बोस को 75,912 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के सब्यसाची दत्ता 67,915 वोटों पर सिमट गए थे।

2016 का हाल: उस वक्त वोटिंग प्रतिशत थोड़ा बेहतर (68.06%) था और सुजीत बोस ने कांग्रेस के अरुणव घोष को मात दी थी।

2026 के लिए क्या है खास?

इस बार चुनाव आयोग ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया पर जोर दे रहा है। 2002 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि हर पात्र नागरिक वोट डाल सके। विधाननगर जैसे शिक्षित और जागरूक इलाके में नए वोटर्स की एंट्री किसी भी पार्टी का खेल बना या बिगाड़ सकती है।

उम्मीदवार और चुनावी तारीखें

फिलहाल राजनीतिक दलों ने अपने पत्तों का खुलासा नहीं किया है। टीएमसी जहां सुजीत बोस के चेहरे पर भरोसा कर सकती है, वहीं भाजपा और कांग्रेस-वामदल गठबंधन किसी नए और प्रभावशाली चेहरे की तलाश में हैं। चुनाव आयोग ने अभी तक तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन गलियारों में चर्चा है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने की पूरी संभावना है।

निष्कर्ष: क्या विधाननगर की जनता फिर से अपने पुराने ‘कैप्टन’ पर भरोसा जताएगी या इस बार बदलाव की लहर बहेगी? यह तो चुनाव की तारीखों के एलान और उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही साफ होगा।

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