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अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती : नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप में एफआईआर

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती : नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप में एफआईआर

समग्र समाचार सेवा
प्रयागराज 22 फरवरी : प्रयागराज विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए झूंसी थाने के प्रभारी को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश कथित रूप से नाबालिग बालकों के यौन शोषण के आरोपों की जाँच  के संबंध में पारित किया गया है।

विशेष न्यायाधीश (POCSO अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने पिछले सप्ताह इस मामले में दायर आवेदन पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने पीड़ित ‘बटुकों’ के बयान दर्ज किए, जिन्हें आश्रम में इस नाम से पुकारा जाता है। संबंधित आश्रम का नाम विद्या मठ बताया गया है।

यह आवेदन अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज एवं अन्य की ओर से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 173(4) के तहत प्रस्तुत किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 69, 74, 75, 76, 79 और 109 (यौन अपराधों से संबंधित) तथा पॉक्सो अधिनियम की धाराएं 3, 5, 9 और 17 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।

अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया मामला दर्ज कर जांच की आवश्यकता को स्वीकार किया। इसके बाद झूंसी पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) को विधि अनुसार एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने अदालत के आदेश का स्वागत करते हुए निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की है। वहीं, संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों से जुड़े मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई आवश्यक होती है। अदालत द्वारा सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश यह दर्शाता है कि प्रस्तुत तथ्यों को गंभीरता से लिया गया है।

अब पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर जाँच  प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जाँच  के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले पर राज्य स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।

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