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बांग्लादेश में सियासी भूचाल: राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन का यूनुस पर आरोप

बांग्लादेश में सियासी भूचाल: राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन का यूनुस पर आरोप

समग्र समाचार सेवा
बांग्लादेश,ढाका 23 फरवरी : बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति मुहम्मद शहबुद्दीन  ने नोबेल पुरस्कार विजेता और पूर्व मुख्य सलाहकार  मुहम्मद पर उन्हें पद से हटाने की असंवैधानिक साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है।

बांग्ला दैनिक ‘कालेर कंठो’  को दिए साक्षात्कार में शाहाबुद्दीन ने दावा किया कि यूनुस के कार्यकाल के दौरान उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी निर्णयों से दूर रखा गया और देश में “संवैधानिक शून्य” पैदा करने की कोशिश हुई।

राष्ट्रपति ने कहा कि डेढ़ साल के दौरान उनसे कोई औपचारिक संवाद नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सलाहकार ने 14 से 15 विदेश यात्राएं कीं, लेकिन एक बार भी लौटकर उन्हें लिखित या मौखिक रूप से जानकारी नहीं दी। उन्होंने इसे संविधान के प्रति गंभीर लापरवाही बताया।

शाहाबुद्दीन ने खुद को “महल का कैदी” बताते हुए कहा कि उनकी कोसोवो और कतर यात्रा के प्रस्तावों को भी रोक दिया गया। उनके अनुसार, यह राष्ट्रपति पद की गरिमा के खिलाफ था।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यूनुस सरकार के दौरान 133 अध्यादेश जारी किए गए। हालांकि उन्होंने माना कि कुछ परिस्थितियों में अध्यादेश जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में अध्यादेश लाना उचित नहीं था।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि चुनाव से पहले अमेरिका के साथ हुए अंतिम समझौते की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उनका कहना था कि ऐसे किसी भी समझौते की सूचना राष्ट्रपति को देना संवैधानिक दायित्व है।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह रहा कि एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को उनकी जगह बैठाने की साजिश रची गई थी। हालांकि, संबंधित न्यायाधीश ने संवैधानिक सीमाओं का हवाला देते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया।

22 अक्टूबर 2024 को बंगाभवन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों को याद करते हुए राष्ट्रपति ने इसे “डरावनी रात” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ को उकसाया गया और राष्ट्रपति भवन को लूटने की कोशिश हुई। बाद में सेना की तैनाती से स्थिति काबू में आई।

शाहाबुद्दीन ने कहा कि बांग्लादेश  और बांगलादेश  के नेताओं ने संवैधानिक निरंतरता बनाए रखने में उनका साथ दिया।

इन आरोपों के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और देश एक बार फिर सियासी अस्थिरता के दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।

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