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64 संसदीय मित्रता समूहों का गठन, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को नई दिशा

64 संसदीय मित्रता समूहों का गठन, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को नई दिशा

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 25 फरवरी:अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को संसदीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 64 ‘पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स’ (संसदीय मित्रता समूह) के गठन की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न देशों की संसदों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को सुदृढ़ करना और संवाद को संस्थागत रूप देना है। प्रत्येक समूह में एक नेता सहित कुल 11 सांसदों को शामिल किया गया है, जिससे विविध राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

इस पहल की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। शशि थरूर को फ्रांस के साथ मित्रता समूह का नेतृत्व सौंपा गया है, जबकि अखिलेश यादव जापान से जुड़े समूह की कमान संभालेंगे। यह कदम संसदीय कूटनीति को दलगत राजनीति से ऊपर उठाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन समूहों का मुख्य उद्देश्य भारत और संबंधित देशों की संसदों के बीच नियमित संवाद स्थापित करना, प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान बढ़ाना और सांस्कृतिक व शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार-से-सरकार वार्ता के अलावा संसद-से-संसद संवाद भी द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देता है। इससे नीति निर्माण में विविध दृष्टिकोण शामिल होते हैं और आपसी विश्वास मजबूत होता है।

संसदीय मित्रता समूहों के माध्यम से सांसद संबंधित देशों की राजनीतिक व्यवस्था, विधायी प्रक्रियाओं और विकास मॉडल का अध्ययन कर सकेंगे। इसके साथ ही व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। यह पहल भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम भारत की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा है। बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संसदीय कूटनीति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 64 समूहों का गठन भारत की सक्रिय विदेश नीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रसार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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