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जेएनयू में हिंसक झड़प, 14 छात्र गिरफ्तार

जेएनयू में हिंसक झड़प, 14 छात्र गिरफ्तार

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 27 फरवरी :जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर गुरुवार देर शाम उस समय तनाव का केंद्र बन गया जब छात्रों और दिल्ली पुलिस  के बीच तीखी झड़प हो गई। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने शुक्रवार को 14 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले करीब 50 छात्रों को हिरासत में लिया गया था।

पुलिस के अनुसार, विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर छात्रों का प्रदर्शन उस वक्त उग्र हो गया जब वे मार्च निकालकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तक जाने की कोशिश कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की, जूते फेंके और उन्हें काटने की भी कोशिश की।

घटना के बाद वसंत कुंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 221, 121(1), 132 और 3(5) लगाई गई हैं, जिनमें लोक सेवकों को ड्यूटी से रोकने और हमला करने जैसे गैर-जमानती आरोप शामिल हैं।

गिरफ्तार छात्रों में जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा , उपाध्यक्ष  गोपिका बाबू , संयुक्त सचिव  दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार  शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि ये सभी लंबे मार्च के दौरान हुई झड़प में शामिल थे।

पूरी रात परिसर में तनाव बना रहा। छात्रसंघ ने गिरफ्तारी के विरोध में ‘कंप्लीट लॉकडाउन’ और नए मार्च का आह्वान किया। प्रशासन ने एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।

विवाद की जड़ 16 फरवरी को प्रसारित एक पॉडकास्ट बताया जा रहा है, जिसमें जेएनयू की कुलपति  संतिश्री डी. पंडित पर दलितों और अश्वेत समुदायों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। छात्रों का दावा है कि कुलपति ने “स्थायी पीड़ित मानसिकता” जैसी टिप्पणी की और कहा कि हमेशा पीड़ित बने रहकर प्रगति संभव नहीं है।

कुलपति ने कथित तौर पर यह भी कहा कि एक वर्ग को “स्थायी पीड़ित” और दूसरे को “स्थायी उत्पीड़क” बताना “हकीकत गढ़ने” जैसा है, जो अस्थायी भावनात्मक संतोष दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

इन टिप्पणियों के विरोध में छात्रों ने उनके इस्तीफे की मांग की और शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और विश्वविद्यालय प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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