Site icon Samagra Bharat News website

नेपाल की राजनीति : बालेन शाह की लहर, ओली अपने ही गढ़ में पीछे

पूनम शर्मा
नेपाल की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। ताज़ा चुनावी रुझानों में युवा नेता और काठमांडू के मेयर रह चुके Balendra Shah (बालेन शाह) तेजी से आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, जबकि चार बार प्रधानमंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता K. P. Sharma Oli अपने ही मजबूत क्षेत्र में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। यह परिणाम न केवल एक चुनावी मुकाबला है, बल्कि नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत परिवर्तन का संकेत भी माना जा रहा है।

युवाओं की लहर ने बदली राजनीति

नेपाल में हाल के वर्षों में जनता, खासकर युवाओं के बीच पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति नाराजगी बढ़ती गई है। भ्रष्टाचार, अस्थिर सरकारें और विकास की धीमी रफ्तार के कारण जनता बदलाव चाहती थी। पिछले साल हुए बड़े युवा आंदोलन के बाद देश की राजनीति में नई ऊर्जा दिखाई दी और उसी लहर पर सवार होकर बालेन शाह राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए।

बालेन शाह पेशे से इंजीनियर रहे हैं और राजनीति में आने से पहले एक लोकप्रिय रैपर के रूप में भी जाने जाते थे। काठमांडू के मेयर के रूप में उनके काम और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्त छवि ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।

चुनाव में चौंकाने वाले संकेत

नेपाल के आम चुनाव में शुरुआती रुझानों के अनुसार शाह की पार्टी कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कई निर्वाचन क्षेत्रों में उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि झापा-5 सीट, जिसे लंबे समय से केपी शर्मा ओली का गढ़ माना जाता रहा है, वहां भी बालेन शाह बढ़त बनाते नजर आ रहे हैं।

मतगणना के शुरुआती चरण में शाह ने हजारों वोटों की बढ़त हासिल कर ली थी, जिससे राजनीतिक विश्लेषक इसे “राजनीतिक भूकंप” कह रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि नेपाल की जनता पुराने राजनीतिक ढांचे से हटकर नए नेतृत्व की तलाश कर रही है।

पारंपरिक दलों के लिए चेतावनी

नेपाल की राजनीति में लंबे समय से कुछ ही दलों का प्रभुत्व रहा है। लेकिन इस चुनाव में जनता का मूड अलग दिखाई दे रहा है। कई मतदाता यह मानते हैं कि लगातार बदलती सरकारों और राजनीतिक अस्थिरता ने देश के विकास को प्रभावित किया है।

पिछले 18 वर्षों में नेपाल में लगभग 14 सरकारें बन चुकी हैं, जिससे शासन में स्थिरता नहीं बन पाई। ऐसे में युवा मतदाता एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में हैं जो पारंपरिक राजनीति से अलग सोच लेकर आए। बालेन शाह उसी उम्मीद का चेहरा बनकर उभरे हैं।

जनकपुर से शुरू किया चुनाव अभियान

बालेन शाह के चुनाव अभियान की एक खास बात यह भी रही कि उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत काठमांडू से नहीं, बल्कि जनकपुर से की। जनकपुर धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है और देवी सीता का जन्मस्थान माना जाता है।

उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मैथिली भाषा में “माता जानकी को प्रणाम” कहकर की, जिससे मधेश क्षेत्र के लोगों के बीच उनका संदेश सीधे पहुंचा। इस रणनीति को नेपाल के विविध क्षेत्रों को साथ लाने की कोशिश के रूप में देखा गया।

भारत-नेपाल संबंधों पर भी नजर

यदि चुनाव परिणाम अंतिम रूप से बालेन शाह के पक्ष में जाते हैं और वे प्रधानमंत्री बनते हैं, तो भारत-नेपाल संबंधों पर भी विशेष नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध गहरे हैं, इसलिए नई सरकार की विदेश नीति महत्वपूर्ण होगी।

भारत ने नेपाल में शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया का स्वागत किया है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए वहां की जनता और अंतरिम सरकार को बधाई दी है।

क्या नेपाल में शुरू होगा नया दौर?

नेपाल के इन चुनावों को कई विशेषज्ञ “जनरेशन बदलाव” का चुनाव बता रहे हैं। यदि बालेन शाह की बढ़त कायम रहती है, तो यह नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है—जहां युवा नेतृत्व, पारदर्शिता और नई राजनीतिक सोच को ज्यादा महत्व मिलेगा।

अब सभी की नजर अंतिम नतीजों पर टिकी है। लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने नेपाल की राजनीति को पहले ही बदल दिया है और देश में बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है।

Exit mobile version