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बैंकॉक : हिंदू नववर्ष की भव्यता स्वामी विज्ञानानंद जी का ओजस्वी भाषण

बैंकॉक : हिंदू नववर्ष की भव्यता स्वामी विज्ञानानंद जी का ओजस्वी भाषण

पूनम शर्मा
बैंकॉक में विश्व हिंदू परिषद (VHP) थाईलैंड इकाई द्वारा हिंदू नववर्ष का पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। यह भव्य आयोजन सराफ सदन में आयोजित हुआ, जहां 200 से अधिक लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया।

इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग एक साथ एकत्रित हुए, जिन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और साझा विरासत के प्रति अपनी आस्था और जुड़ाव को प्रकट किया। कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुई।

शंखनाद (शंख की पवित्र ध्वनि) के साथ वातावरण गूंज उठा, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह परंपरा प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का प्रतीक मानी जाती है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वामी विज्ञानानंद जी का प्रेरणादायक उद्बोधन रहा। वे विश्व हिंदू परिषद भारत के संयुक्त महासचिव, आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं।

स्वामी विज्ञानानंद जी ने अपने चर्चित ग्रंथ  Hindu Manifesto के संदर्भ में हिंदू पहचान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल एक धार्मिक विचार नहीं, बल्कि एक समावेशी जीवन दृष्टि है, जो वैश्विक एकता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और मानवीय मूल्यों पर आधारित है।

उन्होंने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में हिंदू समाज को अपनी जड़ों से जुड़ते हुए विश्व स्तर पर सकारात्मक योगदान देने की आवश्यकता है। उनके विचारों ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया और कार्यक्रम को एक वैचारिक दिशा प्रदान की।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक संवाद और सांस्कृतिक सहभागिता के साथ हुआ, जिसमें लोगों ने एक-दूसरे के साथ अपने विचार साझा किए ।

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