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चीन : मेगा डैम से भारत-बांग्लादेश को पर्यावरणीय खतरा

चीन : मेगा डैम से भारत-बांग्लादेश को पर्यावरणीय खतरा

समग्र समाचार सेवा

 नई दिल्ली, 11 जुलाई : चीन द्वारा तिब्बत में भारत की सीमा के करीब यारलुंग त्सांगपो नदी (जो भारत में ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश में जमुना कहलाती है) पर बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर डैम को लेकर गंभीर भूगर्भीय और पर्यावरणीय खतरे सामने आए हैं। दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के राज्य-नियंत्रित भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि डैम के नीचे सक्रिय पैइझेन फॉल्ट लाइन है, जो उसकी संरचनात्मक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

अध्ययन के मुताबिक, यह फॉल्ट लाइन प्लिस्टोसीन (आइस एज) से आज तक सक्रिय है और इससे डैम, पुल, सड़क, सुरंग जैसी संरचनाएं भूकंप या भूस्खलन जैसी घटनाओं से प्रभावित हो सकती हैं। वर्ष 2017 के मिलिन भूकंप (रिक्टर पैमाने पर 6.9) को भी इसी फॉल्ट लाइन से जोड़ा गया है।

यारलुंग त्सांगपो डैम की सालाना उत्पादन क्षमता 300 अरब किलोवाट-घंटा बताई जा रही है, जो चीन के थ्री जॉर्जेस डैम की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डैम के निर्माण क्षेत्र में चट्टानों की कमजोर पकड़ और सतह की ढीली संरचना इस परियोजना को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इस डैम के चलते भविष्य में भारत और बांग्लादेश में जल प्रवाह, बाढ़, और पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका है। इसके अलावा चीन के इस कदम पर भू-राजनीतिक चिंता भी जताई जा रही है क्योंकि ब्रह्मपुत्र नदी का जल-प्रवाह इन देशों के लिए जीवनरेखा है।

अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि डैम के निर्माण के दौरान ढलानों को मजबूत करने, रिटेनिंग बैरियर्स लगाने और अन्य सुरक्षात्मक उपायों को अपनाया जाए, ताकि संभावित भूस्खलन और संरचनात्मक क्षति को रोका जा सके।

 

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