Site icon Samagra Bharat News website

सुप्रीम कोर्ट : अकेली महिला द्वारा खुद के निवास पर आजीविका के लिए वेश्यावृत्ति अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट : अकेली महिला द्वारा खुद के निवास पर आजीविका के लिए वेश्यावृत्ति अपराध नहीं

 समग्र समाचार सेवा

 नई दिल्ली, 11  जुलाई : सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति व संबंधित कानूनों की व्याख्या को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। जस्टिस जेबी पारदवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (आईटीपीए) का उद्देश्य वेश्यावृत्ति को पूरी तरह अपराध घोषित करना नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपे शोषण, मानव तस्करी और संगठित गिरोहों पर रोक लगाना है।

कोर्ट ने कहा कि यदि कोई वयस्क महिला अपनी आजीविका के लिए अकेले अपने निवास स्थान से वेश्यावृत्ति करती है, और वहां कोई दलाल, एजेंट या अन्य महिला शामिल नहीं है, तो उस जगह को कानून के तहत वेश्यालय नहीं माना जाएगा। अदालत ने अपने फैसले में वेश्यालय की कानूनी परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि कानून का मुख्य लक्ष्य तस्करों व शोषकों को दंडित करना है, न कि पेशे में शामिल महिला को।

फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों के पास या अधिसूचित क्षेत्रों में वेश्यावृत्ति या ग्राहकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां अभी भी दंडनीय हैं। अदालत ने कानून की व्याख्या करते समय मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों में मिसाल बनेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से देश में वेश्यावृत्ति एवं उससे जुड़े कानूनों के सामाजिक विमर्श को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

Exit mobile version