Site icon Samagra Bharat News website

मध्यप्रदेश 27% ओबीसी आरक्षण: हाई कोर्ट में संवैधानिक सीमा पर बहस

मध्यप्रदेश 27% ओबीसी आरक्षण: हाई कोर्ट में संवैधानिक सीमा पर बहस
  • 27% ओबीसी आरक्षण पर हाई कोर्ट की विशेष पीठ में बहस तेज
  • याचिकाकर्ताओं ने 50% संवैधानिक सीमा का उल्लंघन बताया
  • सरकारी भर्तियों, अभ्यर्थियों और नीति पर सीधा असर
  • अंतिम फैसला भविष्य की आरक्षण व्यवस्था की दिशा तय करेगा

समग्र समाचार सेवा
जबलपुर ,16 जुलाई :
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के 2019 के सरकारी फैसले को चुनौती देने वाली 91 याचिकाओं पर बुधवार को हाई कोर्ट की विशेष पीठ में नियमित सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने दलील दी कि संविधान के अनुसार कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता और राज्य का निर्णय इस संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि 50% से अधिक आरक्षण केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है।

कोर्ट ने पहले दिन बहस के बाद सुनवाई गुरुवार दोपहर तक स्थगित कर दी। मामले का सीधा असर प्रदेश की सरकारी भर्तियों, पदोन्नतियों और सामाजिक न्याय की अवधारणा पर पड़ रहा है। कई विभागों में नियुक्तियां हाई कोर्ट के अंतरिम आदेशों के चलते रुकी हुई हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य न्यायिक फैसले पर टिका है।

राज्य सरकार का पक्ष है कि सामाजिक-सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना जरूरी है, वहीं याचिकाकर्ता इसे संवैधानिक सीमा का उल्लंघन मान रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यह विवाद केवल प्रतिशत तक सीमित नहीं, बल्कि संविधान के समानता के अधिकार और आरक्षण की मूल अवधारणा से जुड़ा है। अंतिम फैसला प्रदेश की आरक्षण नीति के साथ-साथ अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।

Exit mobile version