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सुप्रीम कोर्ट : यौन अपराध मामलों में न्यायिक भाषा बदलने की सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट : यौन अपराध मामलों में न्यायिक भाषा बदलने की सिफारिश सुरक्षित रखें

समग्र समाचार सेवा 

नई दिल्ली, 4 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी (NJA) की विशेषज्ञ समिति ने यौन अपराध मामलों में न्यायिक भाषा में बदलाव की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में न्यायाधीशों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों से बचें जो पितृसत्तात्मक या रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा दें, और पीड़ित के लिए मानसिक आघात का कारण बनें।
समिति ने “प्रॉसिक्यूट्रिक्स” की जगह “पीड़ित” या “सर्वाइवर”, “लज्जा भंग” की जगह “यौन हमला” जैसे शब्दों के प्रयोग की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल साक्ष्यों और कानून पर आधारित निष्पक्ष निर्णय देना है, न कि नैतिकता या सामाजिक मानकों का आकलन।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन से यौन अपराध मामलों की सुनवाई अधिक संवेदनशील, निष्पक्ष और पीड़ित-केंद्रित बन सकेगी।

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