Site icon Samagra Bharat News website

छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय समिति

छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय समिति

समग्र समाचार सेवा 

नई दिल्ली, 21 अगस्त :सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए छात्र आंदोलनों में पुलिस और सुरक्षाबलों द्वारा की गई कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के लिए 5 सदस्यीय हाई-पावर जांच समिति (HPEC) गठित की है। समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। सदस्यों में पूर्व पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज शलिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और सेवानिवृत्त मेघालय पुलिस महानिदेशक डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

समिति देशभर में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग (पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज, आंसू गैस), महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, पुलिस निगरानी, भीड़ नियंत्रण के अनुपात और पीड़ितों को मेडिकल सहायता व मुआवजा देने जैसी शिकायतों की जांच करेगी। साथ ही पुलिस पर हुए हमलों और सार्वजनिक संपत्ति को पहुंची क्षति की भी समीक्षा करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि छात्रों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए वे संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं, बशर्ते कि मामलों में कोई गंभीर आपराधिक इतिहास न हो।

कोर्ट ने माना कि आपराधिक प्रक्रिया का छात्रों के जीवन और भविष्य पर गहरा असर पड़ता है। इसमें पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान तकनीक, निगरानी, निजता और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) जैसे संवैधानिक मुद्दों की भी जांच होगी।

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों में हुई झड़प, लाठीचार्ज और आँसू  गैस की घटनाओं के वीडियो वायरल हुए थे, जिससे देशभर में बवाल मचा था।

सुप्रीम कोर्ट की यह समिति जल्द ही जाँच शुरू करेगी और अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी।

Exit mobile version