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जल संकट को अवसरों में बदला जा सकता है: पीएम मोदी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 3 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल सुरक्षा के मुद्दे पर देश के सभी राज्यों और केंद्रीय विभागों को एक साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया है। राष्ट्रीय विभागीय जल शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यदि हमारी योजनाएं व्यवस्थित और दूरदर्शी हों, तो जल संकट जैसी चुनौतियों को भी बड़े अवसरों में बदला जा सकता है। अपने गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पर्याप्त संसाधनों, पक्की प्रतिबद्धता और योग्य अधिकारियों की तैनाती से जल प्रबंधन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

‘टीम इंडिया’ के दृष्टिकोण और सतत समीक्षा की जरूरत

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल सुरक्षा अब केवल किसी एक विभाग की फाइल तक सीमित नहीं रह जानी चाहिए, बल्कि यह पूरे देश की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे जल से जुड़ी पहलों को एक बार का कार्यक्रम न समझें, बल्कि इसकी नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग के लिए एक ठोस तंत्र विकसित करें। केंद्र और राज्यों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के साथ ‘टीम इंडिया’ के रूप में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा गवर्नेंस का उपयोग

आधुनिक दौर में तकनीक की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने जल क्षेत्र में डेटा गवर्नेंस को और अधिक मजबूत करने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि देश भर से जल से जुड़े आंकड़ों को एक मंच पर लाकर एकसमान प्रारूप में व्यवस्थित किया जाना चाहिए। इसके प्रभावी विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सटीक और अनुमानित योजनाएं (Anticipatory Planning) तैयार की जा सकें। इसके अलावा कृषि और उद्योगों में उपचारित पानी (Treated Water) के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।

जनभागीदारी और ‘जल उत्सव’ का आह्वान

जल संरक्षण को केवल सरकारी अभियान तक सीमित न रखकर इसे एक जन आंदोलन (People’s Movement) बनाने की अपील करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। जन जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘जल उत्सव’ जैसे आयोजनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्कूली पाठ्यक्रम में जल संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े विषयों को शामिल करने तथा बांध सुरक्षा के लिए मानसून से पहले की जाने वाली तैयारियों को और अधिक पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं।

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