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सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन

समग्र समाचार सेवा

सहारनपुर, 5 सितंबर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से इस वक्त की एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। यहाँ के कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर बनी एक मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद प्रशासन ने शनिवार तड़के कड़ा रुख अपनाते हुए बुलडोजर की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई जिला जज की अदालत द्वारा उस आदेश को बरकरार रखने के बाद की गई है, जिसमें इस धार्मिक ढांचे को अवैध घोषित किया गया था। सुबह-सुबह हुई इस अचानक कार्रवाई से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। एहतियात के तौर पर कलेक्ट्रेट परिसर के सभी पांचों गेटों को सील कर दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल के साथ-साथ पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया है।

क्या है पूरा कानूनी विवाद और मामला?

इस पूरे मामले की शुरुआत बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सहारनपुर जिला मुख्यालय और डीएम कार्यालय जैसे अतिसंवेदनशील कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर यह मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई है। इसके साथ ही यह भी आरोप था कि इस परिसर का इस्तेमाल केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों और किराए पर कमरे देने के लिए भी किया जा रहा था। मामले की सुनवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने गत 17 जुलाई को इसे अवैध करार देते हुए इसके ध्वस्तीकरण और भारी जुर्माने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की थी। दो सितंबर को जिला अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया और प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया।

सपा सांसद इकरा हसन हुईं हाउस अरेस्ट

इस पूरी कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति मेंवान गरमा गई है। कैराना से समाजवादी पार्टी की लोकसभा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया है कि जब वे सहारनपुर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहती थीं और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करना चाहती थीं, तो उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें उनके शामली स्थित आवास पर रोक लिया और हाउस अरेस्ट कर लिया। इकरा हसन ने प्रशासन के इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि एक जन प्रतिनिधि को जनता की आवाज उठाने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासनिक मनमानी ही सब कुछ है, तो न्यायपालिका और कानून की क्या प्रासंगिकता रह जाती है?

प्रशासन और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया

घटनास्थल पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (DIG और DM) ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से न्यायिक आदेशों के अनुपालन में और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है और कहा है कि इस मामले में कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखी जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।

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