रेलवे स्टेशनों को हवाई अड्डों जैसी चाक चौबंद करने की योजना -का सच नयी दिल्ली। रेलयात्रियों की सुरक्षा और प्लेटफॉर्म पर भीड भाड को रोकने के लिए रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा को हवाई अड्डे की तरह किया जाएगा। परीक्षण के तौर पर कुंभ में इलाहाबाद स्टेशन पर इसकी आजमाइश होगी। हुबली स्टेशन पर भी सुरक्षा प्रबंधन की शुरुआत हो गयी है। जहां पर रेलवे अपनी कमियों का मूल्यांकन करेगी।रेलवे स्टेशनों पर लगातार बढ़ती भीड़ भाड़ से रेलवे की व्यवस्था को सुरक्षित बनाना कठिन हो गया है। देश के करीब 500 स्टेशनों पर ही प्लेटफॉर्म टिकट कटता है। तमाम प्रयासों के बावजूद चारो तरफ से हवादार खुले स्टेशनों को प्लेटफार्म टिकट लायक नहीं किया जा सका है।— देशभर में करीब 8400 छोटे बड़े मंझोले रेलवे स्टेशन हैं। मगर केवल 500 हीं ऐसे रेलवे स्टेशन हैं जहां पर आने जाने की व्यवस्था है। करीब एक सौ स्टेशन ही ऐसे हैं जिसमें उतरकर बाहर जाने के लिए रेलवे गेट का ही रास्ता है। हालांकि रेल पटरियों से होकर भी बाहर जाने का रास्ता दिल्ली के लगभग सभी स्टेशनों से है। रेलपटरियों पर कोई बंधन नहीं डालता जा सकता। इसी बाध्यता का लाभ उठाते हुए रेल चोरों लुटेरों के गिरोह पूरे देश में सक्रिय है। प्लेटफॉर्म पर भीड भाड से यात्रियों को बचाना कठिन होता है। वही देर से आने वाले यात्रियों का चलती ट्रेन में दौड़कर पकड़ने के दौरान गिर जाने से सालाना 15 हजार से अधिक लोग हर साल अपनी जान गंवा देते है। रेल पटरियों को पार करते रेल गेट और बिना चौकीदार वाले देश भर के एक लाख रेलवे गेट पर हर साल एक लाख से अधिक लोग मारे जाते हैं। इसी तरह पर्याप्त सुरक्षा के अभाव में रेलयात्रियों की सुरक्षा करा पाना आज भी रेलवे के लिए काफी कठिन है। जिससे निपटने के लिए रेलवे प्रबंधन रेलवे स्टेशन मास्टरों , रेलवे डीआरएम लेबल तक कोई काम नहीं हो पा रहा है। रेलवे थाना और रेलवे पुलिस भी इस मामले में सक्रिय नहीं है। रेलवे पुलिस की अक्षमता और निष्क्रियता के चलते ज्यादातर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म भी यात्रियों को असुरक्षित सा महसूस होते हैं। खासकर रात में रेलवे स्टेशनों के बाहरी इलाके भी यात्रियों के लिए खतरनाक है। बाहर की भीड़भाड़ अनियोजित दुकानों से लेकर कई प्रकार के वाहनों का जमघट भी यात्रियों के लिए सुरक्षित दायरा नहीं बन पाया है। बाहरी इलाके में पाकेटमारो चोर उठाईगिरो के खतरे बने रहते हैं। रेलवे स्टेशनों के बाहरी इलाके में होने वाले अपराधो की सुध न रेलवे लेती है और न ही सामान्य पुलिस। दोनों एक दूसरे पर पुलिस का मामला है तो पुलिस रेलवे का मामला कहकर टालमटोल करते हैं। और इस तरह पुलिस और रेलवे पुलिस के ठीक नाक के नीचे लगातार हो रहे लाखों छोटे बड़े अपराधो पर किसी की नज़र नहीं जाती।विमान की तरह ही रेल की रवानगी से पहले यात्रियों को आने और रिपोर्टिंग करने की योजना तो सराहनीय है। चलती ट्रेन को दौड़कर पकड़ने की कोशिश में नाकाम बेमौत मरने वाले हजारों यात्रियों की जान बचेगी। हालांकि यात्रियों की भरमार और रेलवे स्टाफ की हर जगह उपलब्धता संभव नहीं है। यही वजह है कि सरल सरस सुगम और सार्वजनिक सुलभता के बावजूद देश की धड़कन रेलवे 165 साल में भी आज तक रेल यातायात सुंदर शानदार स्मार्ट और संतोषजनक नहीं है।
रेलवे स्टेशनों को हवाई अड्डो की तरह बनाने की तरह सुरक्षित करने की रणनीति / अनामी शरण बबल
Related Posts
Add A Comment
© 2026 Samagra Bharat News website. All Rights Reserved.
