भोपाल। कहा जाता है कि वाकई अमीरी की कब्र पर पनपी हुई गरीबी काफी पीड़ाजनक अपमानजनक और कष्टदायक होता है। राजनीति में भी डेढ़ दशक तक सतासुख में रहते रहते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस क़दर अतीतजीवी हो गए हैं कि सता जाने के छह- माह के बाद भी शिवराज सिंह चौहान अपने आपको समय के साथ एडजस्ट नहीं कर पा रहे हैं। तभी तो भूत पूर्व हो जाने के बाद भी शिवराज पर अतीत का भूत अभी तक सवार है। चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर पर सवार भूतपूर्व मुख्यमंत्री शिवराज को उतरने की अनुमति नहीं मिलने से वे आगबबूला हो गए। नाराज शिवराज सिंह चौहान ने सख्त लहजे में जिला कलेक्टर से कहा कि ‘ये पिट्ठू कलेक्टर सुन ले देख हमारे दिन भी जल्दी आएंगे तब तेरा क्या होगा’?उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह चौहान चुनाव प्रचार के लिए मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में उमरेठ में जनसभा संबोधित थी। जनसभा के लिए शिवराज के हेलिकॉप्टर को उतरने के लिए अनुमति चाहिए थी लेकिन अधिकारियों ने शाम पांच बजे के बाद हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। बस इसी बात को लेकर शिवराज सिंह चौहान नाराज हो गए और उन्होंने सभा में जिला अधिकारी को पिट्ठठू तक करार देते हुए चेतावनी दे डाली। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बंगाल में ममता दीदी, वो नहीं उतरने दे रही थीं, ममता दीदी के बाद अब कमलनाथ दादा..ये पिट्ठू कलेक्टर सुन ले रे, हमारे दिन भी जल्दी आएंगे, तब तेरा क्या होगा?
इस मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ को घेरते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि हेलिकॉप्टर नहीं उतरने दोगे तो हम कार से जाएंगे। कार से भी नहीं जाने दोगे को हम पैदल जाएंगे लेकिन छिंदवाड़ा तो जाएंगे भाई वहां मुझे जाना ही है। उन्होंने कहा कि मैं तीन बार मुख्यमंत्री रहा मैंने तो किसी का हैलिकॉप्टर कभी नहीं रोका। जनसभा में शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और राज्य की मौजूदा सरकार पर जमकर निशाना साधा। लेकिन उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है और विपक्षी हमलावार हो गए हैं। चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के इस अंहकार की आम ननागरिकों और नौकर शाही समाज में अजीब तरह से देखा जा रहा है । सही है कि सामान्य होकर या बनकर भी लोग यानी पूर्व सीएम शिवराज की चौधराहट कम नही हो पा रही है। यानी कमलनाथ सरकार को जोड़तोड़ से गिराकर फिर से सीएम बनने का मुंगेरीलाल सपना ही देख रहे हैं। ,
हे प्रभू। बीते दिनों की न जाए की याद, हार के बाद भी नहीं गयी शिवराज की चौधराहट
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