समग्र समाचार सेवा
वाराणसी, 27 दिसंबर। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आर. एल. सिंह सभागार में नेशनल ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और भूगोल विभाग, बीएचयू के संयुक्त तत्वाधान में “Trends in Geographical Explanations: Myths and Realities” विषय पर केंद्रित दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर नेशनल एसोसिएशन ऑफ जियोग्राफर ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने अपने द्वारा रचित पुस्तकों को विभागाध्यक्ष को भेंट किया। उन्होंने भूगोल के शोधार्थियों को शोध के विभिन्न नए आयामों से रूबरू कराया। उन्होंने भूगोल विभाग के सभी छात्रों और आचार्यों से आग्रह किया की वे कुछ ऐसे विषयों पर शोध करें कि भूगोल को भी नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित किया जा सके। इस संगोष्ठी में सम्मानित अतिथि के रूप में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश चंद्र राय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग से प्रो. एच. एन. मिश्रा उपस्थित रहे। प्रो. राय ने अपने संबोधन में शोधार्थियों को भूगोल के नये आयामों पर कार्य करने के लिए जागृत किया। वहीं प्रो. मिश्रा ने शोधार्थियों से आग्रह किया की वो जो नये काम करें वो सामाजिक उत्थान के लिए कारगर हो। इस को समर्थन देते हुए उन्होंने संस्कृत के श्लोक
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।

ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः के भावार्थ “सभी प्रसन्न रहें, सभी स्वस्थ रहें, सबका भला हो, किसी को भी कोई दुख ना रहे। ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” पर बल दिया।
इस संगोष्ठी के शुभारंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. वी. एन. शर्मा ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने इस वर्ष कोरोना के प्रकोप से अपने गुजरे हुए सहकर्मियों प्रो. पी. आर. शर्मा, प्रो. राम बिलास और प्रो. रवि शंकर सिंह को विशेष रूप से याद किया। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. वी. के. राय ने सभी को विषय “Trends in Geographical Explanations: Myths and Realities” से रूबरू कराया। विज्ञान संकाय के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने वैश्विक शोध और प्रकाशन का सुझाव देते हुए आयोजकों को इस कार्यक्रम की शुभकामना दी। इस हॉल में अध्यक्षीय संबोधन देते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. वी. के. शुक्ला ने कहा की मनुष्य ने ही प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया है, अतः हमें खुद के सामर्थ्य पर भरोसा करते हुए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए न की प्रौद्योगिकी पर पूर्णतः निर्भर होना चाहिए। अंत में संगोष्ठी के सह-संयोजक प्रो. ए. पी. मिश्रा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. कपिल कुमार गावस्कर ने किया। इस कार्यक्रम में प्रो. आर. एस. यादव, प्रो. वी. के. त्रिपाठी, प्रो. गायत्री राय, प्रो. श्राबनी सान्याल, डॉ. वर्मा, डॉ. मीना तथा विभाग के अन्य सभी आचार्य उपस्थित रहे।

