Saturday, September 19

अध्यात्म

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। गृह मंत्री ने नई…

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आज कल पंचांग का प्रचलन बहुत ही कम है। जीवन की सभी घटनाओं का ब्यौरा हमारे पास सिर्फ ईसवी कैलेंडर के अनुसार ही है, कारण बहुत साफ़ है, घर में घडी भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार है, हाथ घडी भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार है यहाँ तक कि मोबाइल का प्रयोग समय देखने के लिए होने लगा है वह भी ग्रेगोरियन कैलेंडर अनुसार ही है।

‘पंचांग’ भारतीयों द्वारा माना जाने वाला वैज्ञानिक कैलेंडर है।
पंचांग (पंच + अंग = पांच अंग) वैदिक काल-गणना की रीति से निर्मित पारम्परिक कैलेण्डर या कालदर्शक को कहते हैं।

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजनीय देवता का स्थान दिया गया है. किसी भी शुभ या मंगल कार्य से पहले उनका पूजन किया जाता है और ऐसा करने से कार्य में सफलता हासिल होती है. इसके अलावा भगवान गणेश जी का पूजन के लिए बुधवार का दिन सबसे उत्तम है क्योंकि यह दिन भगवान गणेश जी को समर्पित है.

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है और जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. इस दिन यदि विधि—विधान के साथ उनका पूजन किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

नए साल 2023 की शुरुआत हो गई है और जनवरी के पहले महीने में बहुत सारे व्रत-त्योहार पड़ने वाले हैं. सबसे खास बात है कि इस माह कई ऐसे त्योहार आते हैं जिनका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. इसमें लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल समेत कई ऐसे त्योहार हैं जो कि बेहद श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं.

आज पौष माह, शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है और दिन मंगलवार है. आज के पंचांग में आप शुभ मुहूर्त अशुभ मुहूर्त जान सकते हैं. आज त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग शुभ योग हैं ,जबकि अशुभ विडाल योग भी है.

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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने समग्र भारत का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.

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