Saturday, September 19

अध्यात्म

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। गृह मंत्री ने नई…

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श्राद्ध खत्म होने में अब बस कुछ दिन बाकी हैं. वहीं आज एकादशी श्राद्ध भी है. ऐसे में यदि आप बचे हुए दिनों में अपने पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहते हैं तो ऐसे में चींटियों की मदद से उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं. आप चींटी को खिलाकर पूर्वजों को भी तृप्त कर सकते हैं. आज का हमारा लेख इसी विषय पर है. आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आप किन चीजों को चींटियों को खिलाकर अपने पूर्वजों को भी तृप्त कर सकते हैं.

महाभारत के अनुसार, सबसे पहले महातप्सवी अत्रि ने महर्षि निमि को श्राद्ध के बारे में उपदेश दिया था. इसके बाद महर्षि निमि ने श्राद्ध करना शुरू कर दिया. महर्षि को देखकर अन्य श्रृषि मुनियों ने पितरों को अन्न देने लगे। लगातार श्राद्ध का भोजन करते-करते देवता और पितर पूर्ण तृप्त हो गए.

श्राद्ध उसी व्यक्ति का किया जाता है जिसनें पंचतत्वों से बनी देह रूप में जन्म लिया और उसकी मृत्यु हुए एक साल बीत चुका है। अर्थात उसकी बरसी हो चुकी है। उसके बाद जो पितृपक्ष आएगा, उस समय व्यक्ति की मृत्यु तिथि पर उस व्यक्ति का श्राद्ध मनाया जाएगा। श्राद्ध में पंचबलियों (पंचग्रास) का बड़ा महत्व है।

भगवान् विश्वकर्मा जी के शुभ पर्व पर आज एक अत्यंत निकट और प्रियजन के लिए आशीर्वचन पूर्वक एक लघु समीक्षा लिखता हूँ। यह समीक्षा डॉ त्रिभुवन सिंह जी की पूर्व प्रकाशित समीक्षात्मक पुस्तक के सापेक्ष है।

कलाएं कितनी हो सकती हैं?
सब लोकोपयोगी हों। लोक उपयोगी सृजन से बड़ा कोई सृजन नहीं। सृजन श्रम, संघर्ष, समय को बचाने वाला और परिश्रम को सार्थक कर आजीविका देने वाला हो।

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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने समग्र भारत का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.

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