Thursday, September 17

वास्तु

हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है. लेकिन इस बार पूर्णिमा तिथि के साथ ही भद्रा भी लग रही है और इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 30 व 31 अगस्त दो दिन मनाया जाएगा.

भाई-बहन पूरे साल रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतजार करते हैं. नोंक-झोंक भरा भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही मजबूत और प्यारा होता है. इस रिश्ते में चार चांद लगाता है रक्षाबंधन का पर्व.

इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा की, “विज्ञान के सिद्धांतों की उत्पत्ति वेदों में हुई लेकिन उन्हें पश्चिमी खोजों के रूप में पुनः प्रस्तुत किया गया। “

जिस तरह सावन का सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, उसी प्रकार सावन का प्रत्येक मंगलवार माता गौरी को समर्पित है और इस दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना और दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए रखती हैं.

सावन के महीने में आने वाले सभी व्रत व त्योहारों का खास महत्व होता है और नाग पंचमी इन्हीं में से एक है. हिंदू धर्म में नागों को भी पूजनीय स्थान दिया गया है और नाग पंचमी के दिन इनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है.

शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है। वह इसलिए की शिव के सोमसूत्र को लांघा नहीं जाता है। जब व्यक्ति आधी परिक्रमा करता है तो उसे चंद्राकार परिक्रमा कहते हैं।

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