समाज/संस्कृति

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई इन दिनों उत्तर प्रदेश के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ की तरह नाम बदलने की राह पर चलते हुए नजर आ रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्नाटक सरकार जल्द ही एक सर्कुलर जारी करने वाली है जिसके तहद टीपू सुल्तान काल के जिन मंदिरों में दिवतिगे सलाम और सलाम आरती होती है अब उनका नाम बदला जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को महाराष्ट्र में 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसमें 1500 करोड़ से अधिक की राष्ट्रीय रेल परियोजनाएं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ (एनआईओ), नागपुर और नाग नदी प्रदूषण उपशमन परियोजना, नागपुर शामिल हैं।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में काशी तमिल संगमम् में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध को पुनर्जीवित किया है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग एवं आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा में एक भव्य कार्यक्रम में ऐतिहासिक असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो असम के पहले शहीद खड़गेश्वर तालुकदार के 1979 में शहादत दिवस के स्‍मरण में स्वाहिद दिवस मनाया गया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री, श्री गिरिराज सिंह ने भारत के युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण में मांग-आधारित कौशल प्रदान करने का आह्वान किया है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए। मंत्री ने रोजगार प्रशिक्षण की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण बताते हुए उन साधनों का पता लगाने का आग्रह किया जो देश के युवाओं के लिए रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर उत्पन्न करे

जेएनयू में ब्राह्मण – बनिया विरोधी नारों के विरोध में कल मुनिरका मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 1से जेएनयू तक एक शांति मार्च का आयोजन किया गया था। (जो कि हमारे मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है) जिसमें दिल्ली एनसीआर के सनातनी भाइयों और बहनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया किंतु, हमें जेएनयू में प्रवेश नहीं करने दिया गया।

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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने “समग्र भारत” का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.

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