समाज/संस्कृति

भारत के 53वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इजरायल के निर्देशक, लेखक और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता ज्यूरी के अध्यक्ष नादव लापिड ने कहा कि फिल्म महोत्सव का मुख्य विचार सिनेमा की केवल एक दृष्टि को प्रस्तुत करना नहीं है, बल्कि विभिन्न विकल्पों को सामने लाना है।

वर्ष 2020 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने के अपने अनुभव को साझा करते हुए, दिग्गज अभिनेत्री सुश्री आशा पारेख ने कहा कि एक लंबे समय के बाद एक महिला को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार को पाने पर अपने आश्चर्य और खुशी को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैं यह पुरस्कार पाने वाली पहली गुजराती भी हूं।

‘गुरुजन 15वीं-16वीं शताब्दी के असमिया महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव को एक संगीतमय श्रद्धांजलि है।’

ये राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सिनेमैटोग्राफर, लेखक, अभिनेता और निर्देशक अनिल मेहता द्वारा “सिनेमैटोग्राफर के जीवन को परिभाषित करने वाले सिद्धांत” के रूप में साझा किए गए कुछ महत्वपूर्ण सूत्र हैं।

बहुत ज्‍यादा अधिकार जमाने वाला और बहुत ज्‍यादा रोक-टोक करने वाला एक बेटा अपने बुजुर्ग पिता पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है। उसका मानना है कि वह जो भी कर रहा है, उसके पिता के लिए वही सबसे अच्छा है। उधर, उसके पिता अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्‍हें टॉनिक यानी खुशहाल जिंदगी जीने के सहारे के तौर पर एक दवा की जरूरत होती है।

असम के डिब्रूगढ़ से रैगिंग की एक घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला एक छात्र सीनियर्स द्वारा कथित रैगिंग से खुद को बचाने के लिए आत्महत्या करने की कोशिश की और दो मंजिला छात्रावास की इमारत से कूद गया।

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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने “समग्र भारत” का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.

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