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‘गुरुजन 15वीं-16वीं शताब्दी के असमिया महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव को एक संगीतमय श्रद्धांजलि है।’

दिनांक 26 नवंबर, 2008- एक ऐसा दिन जिसे कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल सकता। एक ऐसा दिन जब भारत आतंकवादी हमलों से थर्रा उठा था जिसने उसकी वाणिज्यिक राजधानी मुंबई को हिलाकर रख दिया था।

श्रीलंका (तब सीलोन कहा जाता था) में सिनेमा की शुरुआत 1901 में हुई, देश में पहली बार ब्रिटिश गवर्नर वेस्ट रिजवे और दूसरे बोअर युद्ध के कैदियों के लिए एक निजी प्रदर्शन के तहत एक फिल्म दिखाई गई। यह एक लघु फिल्म थी, जिसमें बोअर युद्ध में ब्रिटेन की जीत, महारानी विक्टोरिया को दफनाया जाना और एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक को दिखाया गया था।

“जन्म से ही कोई अभिनेता नहीं होता। स्कूल के नाटक में मेरा पहला अभिनय एक आपदा था। लेकिन मेरे पिता ने मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के लिए शाम को फूल भेंट किए।” ये बात प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने आज गोवा में आयोजित 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) से अलग ‘स्क्रीन और थिएटर के लिए अभिनय’ विषयवस्तु पर आयोजित मास्टरक्लास में कही।

अमेरिका के मशहूर लेखक जेस लैयर ने कहा है कि बच्चे कोई ऐसी चीज नहीं हैं, जिसे ढाला जा सके, बल्कि लोगों को खुद को उजागर करना है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का 53वां संस्करण बचपन और उसके सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को आकार देने वाले सपनों, गतिशील शक्तियों और बारीकियों को सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उत्तर पूर्व की आठ बहनों (राज्यों) में से एक मणिपुर, जिसे ‘भारत का आभूषण’ भी कहा जाता है, भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के 53वें संस्करण में उत्तर पूर्व भारत की फिल्मों के प्रचार के लिए सबसे आगे होगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आईएफएफआई के 53वें संस्करण की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

जब से गोवा, भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का स्थायी आयोजन स्थल बना है, तब से राज्य ने महोत्सव और इसके प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया है। राज्य का स्वभाव और आतिथ्य ऐसा है कि प्रत्येक महोत्सव के दौरान कई रोमांचक कार्यक्रम और आकर्षण आयोजित किये जाते हैं, जिनसे प्रतिनिधियों को फिर से वापस आने की इच्छा हो।

गोवा में 20 नवंबर से 28 नवंबर तक आयोजित होने वाले 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) की शुरुआत ऑस्ट्रियाई फिल्म ‘अल्मा एंड ऑस्कर’ से होगी।