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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को मीडिया से न्यायपालिका के बारे में रिपोर्टिंग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि हमें न्यायाधीशों की गरिमा और न्यायपालिका के लिए सम्मान को बनाये रखना चाहिए, क्योंकि ये कानून के शासन और संवैधानिकता के मूल सिद्धांत हैं।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को आईएएस अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपनी पहचान की गोपनीयता के सिद्धांत को बरकरार रखते हुए नागरिकों को सेवाओं की डिलिवरी और शिकायत निवारण में सुधार लाने के लिए समर्पन के साथ काम करें।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम” (दुनिया एक परिवार है) की अवधारणा हमारे हमारे शिष्ट समाज के सदाचार संबंधी मर्म का प्रतिनिधित्व करती है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा कि भारत में दूसरों के विचारों के लिए ना केवल ‘सहिष्णुता’ की शानदार विरासत है, बल्कि यहां सभी तरह के विचारों के साथ ‘व्यवहार’ की अनोखी परंपरा रही है- यहां बहुलतावाद और समन्वयता की संस्कृति रही है। उन्होंने आगे कहा कि आपसी सम्मान की भावना का भारतीय राजाओं ने भी प्रदर्शन किया है- इसमें महान अशोक से लेकर राजकुमार दारा शिकोह तक शामिल रहे हैं।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ गुरूवार को आधिकारिक दौरे पर राजस्थान पहुंचे। भारत का उपराष्ट्रपति बनने के बाद राज्य का यह उनका पहला दौरा है। यात्रा के दौरान, उन्होंने कई पवित्र स्थलों का दौरा किया और कई सम्मान कार्यक्रमों में भाग लिया।
ओणम पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं हैं।
उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज धर्मगुरुओं और मीडिया से लोगों की शंकाओं को दूर करने और अहम महत्व के इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा करके अंगदान के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की।
एशियाई वॉलीबॉल चैम्पियनशिप में हाल ही में रजत पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष वॉलीबॉल अंडर -20 टीम ने बुधवार को यहां उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है।
निष्पक्ष एवं स्वतंत्र न्याय व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों के फलने-फूलने और उसमें निखार लाने के लिए सबसे सुरक्षित गारंटी है।
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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने “समग्र भारत” का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.
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