गज़ल: खारे सागर में मिल गई होगीBy Samagra BharatAugust 3, 2022 खारे सागर में मिल गई होगी कितनी प्यासी “किरण” नदी होगी हमने सपने में भी न सोचा था ज़िंदगी इतनी बेसुरी होगी