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एक दिन (संध्या के समय) सरयू के तट पर…..तीनों भाइयों संग टहलते श्री राम से भरत भैया ने कहा , “एक बात पूछूँ” ? भईया !!
माता कैकई ने आपको वनवास दिलाने के लिए मँथरा के साथ मिल कर जो ‘षड्यंत्र’ किया था , क्या वह राजद्रोह नहीं था ?
उनके ‘षड्यंत्र’ के कारण….एक ओर राज्य के भावी महाराज और महारानी को (14) चौदह वर्ष का वनवास झेलना पड़ा….तो दूसरी ओर पिता महाराज की दु:खद मृत्यु हुई । ऐसे ‘षड्यंत्र’ के लिए (सामान्य नियमों के अनुसार) तो मृत्युदण्ड दिया जाता है , फिर आपने माता कैकई को दण्ड क्यों नहीं दिया ?

डॉ. शंकर शरण) नाथूराम गोडसे के जीवन, चरित्र और विचारों का समग्र मूल्यांकन करने पर उनका स्थान भगत सिंह और ऊधम सिंह की पंक्ति में चला…