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पूनम शर्मा कुछ दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. गवई ने कहा था कि “मेरे लिए संसद नहीं, संविधान सर्वोच्च है।” यह बयान संवैधानिक मूल्यों…
भारत में हर हिन्दू पर्व को जानबूझकर कथित रूप से धर्मनिरपेक्षता के झुनझुने में कैद करने का कुप्रयास किया गया है। यह देखना बहुत ही दुखद है कि हर पर्व पर हिन्दू मुस्लिम होने लगता है। मजे की बात यह है कि यह लिब्रल्स का अजीब तर्क है कि वह हिन्दुओं के पर्वों तक को सेक्युलर बनाना चाहते हैं, मगर मुस्लिमों के क्षेत्र ऐसा बनाना चाहते हैं, जहाँ से हिन्दुओं की धार्मिक शोभायात्रा नहीं निकाल सकते हैं, क्योंकि उनकी भावनाएं आहत हो जाती हैं।
भारत के संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्षता और समाजवादी शब्द को हटाने की मांग भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, सुब्रमण्यम स्वामी ने केशवानंद भारती केस 1973 का हवाला देते हुए कहा प्रस्तावना संविधान का अंग है इसने बदलाव नहीं किया जा सकता है।