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✍🏻मुदित अग्रवाल जब मैं बृहत्तर भारत की बात करता हूँ उसमें केवल भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं आता| उसमें आता है अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, नेपाल,…
संस्कृति- पितृपक्ष- आभार भाव प्रकटन की पंचबलि
श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत में प्रैति कहते हैं, से जुड़ा हुआ है। प्रैति ही बाद में बोलचाल में प्रेत बन गया। यह कोई भूत-प्रेत वाली बात नहीं है। शरीर में आत्मा के अतिरिक्त मन और प्राण हैं। आत्मा तो कहीं नहीं जाती, वह तो सर्वव्यापक है, उसे छोड़ दें तो शरीर से जब मन को निकलना होता है, तो मन प्राण के साथ निकलता है। प्राण मन को लेकर निकलता है।
श्राद्ध उसी व्यक्ति का किया जाता है जिसनें पंचतत्वों से बनी देह रूप में जन्म लिया और उसकी मृत्यु हुए एक साल बीत चुका है। अर्थात उसकी बरसी हो चुकी है। उसके बाद जो पितृपक्ष आएगा, उस समय व्यक्ति की मृत्यु तिथि पर उस व्यक्ति का श्राद्ध मनाया जाएगा। श्राद्ध में पंचबलियों (पंचग्रास) का बड़ा महत्व है।
संस्कृति- पितृपक्ष : भारतीय संस्कृति में श्राद्ध
संस्कृति: पितृपक्ष : तर्पण और श्राद्ध-भोज
संस्कृति- पितृपक्ष : पूर्वजों का पखवाड़ा
डॉ. ओमप्रकाश पांडे श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत…