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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 77वें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से संबोधित करते हुए भारत के विश्व की 10वीं से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का श्रेय भारत के 140 करोड़ लोगों के प्रयासों को दिया।
नई दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, देश भर से 50 नर्सों को उनके परिवार के सदस्यों के साथ लाल किले की प्राचीर से समारोह में भाग लेने और देखने के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए “एक विश्व, एक परिवार, एक भविष्य” की अवधारणा को सामने रखा है और हम इस दिशा में काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि भारत मणिपुर के लोगों के साथ खड़ा है।
77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुएप्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे भारत की जी-20 अध्यक्षता ने दुनिया को देश के आम नागरिक की क्षमता दिखाने में मदद की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए याद दिलाया कि भारत की विश्व रैंकिंग 2014 में 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से सुधर कर आज 2023 में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है।
एक गौरवान्वित राष्ट्र देशभक्ति के उत्साह के साथ अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश भर से आमंत्रित ‘विशेष अतिथि’ लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक संबोधन के साक्षी बने।
77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि आने वाले महीने में विश्वकर्मा जयन्ती पर विश्वकर्मा योजना लॉन्च की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण के दौरान एक शानदार, युवाओं और देश को उत्साहित करने वाली कविता पढ़ी.
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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने “समग्र भारत” का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.
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