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दिग्गज अभिनेता रियो कपाड़िया नहीं रहे. 66 की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. गुरुवार को इस दुखद खबर से बॉलीवुड में शोक की लहर है.

पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर और सचिन मीणा के आर्थिक तंगी से जूझने की खबर सामने आने के बाद अब इस जोड़े को एक के बाद एक काम के ऑफर मिल रहे हैं.

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली , 01अगस्त। संसद ने चलचित्र संशोधन विधेयक-2023 पारित कर दिया है। लोकसभा ने आज हंगामे के बीच इसे मंजूरी दी। राज्यसभा…

देश में बॉलीवुड इंडस्ट्री और फिल्मों को लेकर लंबे समय से सोशल मीडिया पर बॉयकॉट का ट्रेंड चल रहा है. हाल ही में शाहरुख खान की फिल्म पठान के गाने को लेकर भी विरोध देखने को मिला था. इस मामले पर केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर का बयान सामने आया है.

किशोर कुमार की दिव्य आवाज और राजेश खन्ना का दमदार चरित्र एक बार फिर इस सदाबहार गीत के साथ पणजी के मैकिनेज पैलेस ऑडिटोरियम के पर्दे पर जीवंत हो उठा, और ये दर्शकों के लिए एक सुनहरा क्षण था। गुजरे जमाने की अभिनेत्री और दर्शकों के दिल की धड़कन आशा पारेख, जिन्होंने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया और इस गाने में भी नजर आई थीं,

मराठी भाषा में बच्चों को सोने के समय सुनाई जाने वाली कहानियां अक्सर ‘एकदा काय झाला’ वाक्यांश से शुरू होती हैं। इस वाक्यांश का अर्थ ‘एक समय की बात है’ होता है।

53वें इफ्फी में मणिपुर सरकार का राज्य पवेलियन ‘मणिपुर अनएक्सप्लोर्ड’ फिल्मकारों, अभिनेताओं, निर्देशकों और निर्माताओं को राज्य में फिल्मों की शूटिंग के लिए आकर्षित कर रहा है। कई फिल्म निर्माता उन सुविधाओं के बारे में जानकारी के लिए राज्य के पवेलियन में जा रहे हैं जो यह सुंदर राज्य उन्हें प्रदान करेगा।

“मेरे लिए सफलता का मतलब रोजाना सुबह उठना और वही करना है, जो मुझे पसंद है, और जो मैं हमेशा से करना चाहता था।” यह बात फुकरे फिल्‍म के लोकप्रिय अभिनेता वरुण शर्मा ने कही। वह आज गोवा में 53वें इफ्फी में “इन-कन्वर्सेशन” सत्र में “हाउ टू कार्व योर नीश” के अंतर्गत दर्शकों को संबोधित कर रहे थे।

53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में फ्रांस की फिल्मों की स्क्रीनिंग सोमवार को आईनॉक्स, गोवा में इमैनुएल कैरेरे की ‘बिटवीन टू वर्ल्ड्स’ (ओइस्ट्रेहम) की स्क्रीनिंग के साथ शुरू हुई। फ्रांस ‘कंट्री ऑफ फोकस’ है।

फिल्म का निर्माण पेंटिंग या एक टेनिस के खेल की तरह नहीं है, जहां व्यक्तिगत योगदान या कड़ी मेहनत सफलता निर्धारित करती है। यह फुटबॉल या क्रिकेट की तरह है, जिसमें टीम के हर एक सदस्य का योगदान महत्वपूर्ण होता है। ये बातें गोवा के पणजी में आयोजित 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव से अलग एक मास्टर क्लास में साझा की गई।