Browsing: बलबीर पुंज
-बलबीर पुंज गत दिनों कुख्यात अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय मजहबी स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। 26 जून को जारी हुई इस रिपोर्ट में भारत में मतांतरण…
-बलबीर पुंज वर्ष 1950 से 1980 दशक में हिंदी फिल्मों, राजनीतिक विमर्श और आम बोलचाल की भाषा में एक जुमला— ‘देश में अमीर और अमीर, गरीब…
बलबीर पुंज- हाल ही में एक अदालत द्वारा ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी के तहखाने में हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलने से हिंदू-मुस्लिम संबंधों में तनाव…
-बलबीर पुंज मंगलवार (5 दिसंबर) को आई.एन.डी.आई. गठबंधन के महत्वपूर्ण अंग द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) सांसद डीएनवी सेंथिल कुमार ने लोकसभा में हिंदी भाषी राज्यों को…
14 न्यूज एंकरों का ‘अपराध’ क्या? -बलबीर पुंज बीते सप्ताह विपक्षी गठबंधन (आई.एन.डी.आई.ए.) ने विभिन्न न्यूज चैनलों के 14 टीवी एंकरों का बहिष्कार कर दिया। इस…
काल्पनिक नहीं है ‘लव-जिहाद’ का मुद्दा
इंग्लैंड-वेल्स इन दिनों भीषण विरोधाभास से जूझ रहा है। शताब्दियों से इस यूरोपीय देश की शासकीय व्यवस्था के केंद्र में ईसाई मत है, परंतु उनकी नवीनतम जनगणना में ईसाई अनुयायी ही अल्पमत में आ गए है।
ऐसा कौन सा व्यक्तित्व है, जो भारत की पहचान को परिभाषित कर सकता है?— वह, जिसने इस देश की मूल बहुलतावादी संस्कृति को ध्वस्त किया हो या फिर वे, जिन्होंने उसकी रक्षा में अपने प्राण आहुत कर दिए। यह चर्चा ‘पूर्वोत्तर के शिवाजी’ नाम से प्रसिद्ध, असम के अहोम योद्धा लाचित बोरफुकन की 400वीं जयंती पर दिल्ली में 23-25 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम के कारण प्रासंगिक है।
कितनी बड़ी विडंबना है कि जब 13 नवंबर को पंजाब में ‘आप’ सरकार ने शस्त्रों/हिंसा के सार्वजनिक प्रदर्शन/महिमामंडन पर प्रतिबंध लगाया, तब उसी कालखंड में दो ऐसी घटनाएं सामने आई— जिसने इस आदेश की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। 12 नवंबर को हिंदू नेता सुधीर सूरी की हत्या मामले में कट्टरपंथी सिख संगठनों ने अमृतसर स्थित अदालत परिसर में पेशी के दौरान आरोपी संदीप सिंह ‘सन्नी’ पर फूल बरसाएं और उसके पक्ष में नारेबाजी भी की।