चिंतन- संस्कृति का विकृत रूपBy Samagra BharatJune 12, 2022 पार्थसारथि थपलियाल भारतीय चिंतन परंपरा में ईश्वर की उपस्थिति सर्वत्र मानी गई गई। ईशोपनिषद में कहा गया है कि “ईशावास्यमिदं सर्वं यदकिंचिदजगत्यां जगत” .. संसार की…